”इंडिया ब्लॉक के विरोध से हिली सरकार, असम में हिमंत सरमा ने हाईजैक किया पूरा चुनावी तंत्र”: कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन

विकास शर्मा,
नगांव 7 अक्टूबर 2026/असम.समाचार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन ने हाल ही में संपन्न हुए उपचुनावों को लेकर असम की भाजपा नीत सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताएं और “सिस्टमेटिक रिगिंग” (व्यवस्थित धांधली) की गई है।
मीडिया से बातचीत करते हुए हुसैन ने दावा किया कि सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार को लाभ पहुँचाने के लिए पूरे प्रशासनिक तंत्र और चुनाव मशीनरी के साथ समझौता किया गया।
हुसैन ने कहा, “देशभर में बूथ कैप्चरिंग और वोट चोरी की चर्चाएं होती हैं, लेकिन असम में तो पूरा चुनावी तंत्र ही चुरा लिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बूथ हेरफेर के आरोप लगते हैं, तो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूरी प्रक्रिया को ही हाईजैक करके इसे कई कदम आगे बढ़ा दिया है।”
भाजपा उम्मीदवार पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने चुनाव प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूर्व जिला आयुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी देवाशीष शर्मा की भूमिका को रेखांकित किया, जिन्होंने बाद में पद छोड़कर भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हुसैन ने कहा, “देवाशीष शर्मा ने इस्तीफा देकर भाजपा प्रत्याशी बनने से ठीक पहले उन अहम बैठकों की अध्यक्षता की थी, जिनमें तय किया गया था कि कौन से अधिकारी ईवीएम संभालेंगे और कहां पुलिस बल तैनात होगा। हमने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उनके कार्यकाल में तैनात अधिकारियों को हटाने की लिखित मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
बूथों पर धमकाने और जबरन घुसपैठ का आरोप
मतदान के दिन हुई गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए सांसद ने कहा कि 13 से 15 गाड़ियों के काफिले मतदान केंद्रों के भीतर घुसे और सत्ताधारी दल के विधायकों ने खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों को केंद्रों से जबरन बाहर निकाल दिया गया। जब सबूतों के साथ पुलिस और रिटर्निंग ऑफिसर को इसकी जानकारी दी गई, तो अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं।
मतदान प्रतिशत के आंकड़ों पर संदेह
सामागुरी विधानसभा सीट के मतदान आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए रकीबुल हुसैन ने कहा कि यहां की लगभग 20 से 25 प्रतिशत आबादी रोजगार के सिलसिले में केरल, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे राज्यों में रहती है और उपचुनावों में खर्च अधिक होने के कारण आमतौर पर वापस नहीं आती। उन्होंने सवाल उठाया, “जब करीब एक-चौथाई मतदाता क्षेत्र से बाहर थे, तब 80 प्रतिशत से अधिक मतदान कैसे दर्ज हो गया? यह सांख्यिकीय रूप से असंभव है और फर्जी मतदान का सीधा प्रमाण है।”
हुसैन ने मतगणना से पहले चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को बदलने और गड़बड़ी वाले बूथों पर दोबारा मतदान (री-पोलिंग) कराने की मांग की है।



