इंद्रदेव ने किया अभिषेक, सखियों ने सजाईं नावें; छत्रीबाड़ी के मित्तल सदन में दिखा कान्हा का अद्भुत जलविहार
पूल में तैरती नावों पर विराजे कान्हा, झूम उठीं सखियाँ: छत्रीबाड़ी में आस्था और क्रिएटिविटी का अद्भुत संगम, महाआरती के साथ संपन्न हुआ भव्य गोपाल नौका विहार महोत्सव।

सोनल शर्मा,
गुवाहाटी 19 जुलाई 2026/असम.समाचार
रिमझिम फुहारें, तैरती नावें, कान्हा की मुस्कान और भक्ति का ऐसा सैलाब कि हर कोई सुध-बुध भूल बैठा। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला छत्रीबाड़ी के मित्तल सदन में, जहाँ सांवरिया सखी समिति ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने आधुनिकता के बीच साक्षात वृंदावन को जीवंत कर दिया।
आमतौर पर बच्चे या युवा स्विमिंग पूल में मस्ती करते हैं, लेकिन यहाँ श्रद्धा का एक अनोखा रूप देखने को मिला। समिति ने चार बड़े-बड़े स्विमिंग पूलों को ही ‘यमुना जी’ बना डाला। रंग-बिरंगे तैरते ट्यूब और सजी-धजी नौकाओं में जब 30 बाल गोपालों को विराजमान किया गया, तो ऐसा लगा मानो ठाकुर जी स्वयं जलक्रीड़ा करने धरती पर उतर आए हों। ऊपर से बरसती रिमझिम बूंदों ने माहौल को ऐसा अलौकिक बनाया, मानो इंद्रदेव खुद कान्हा का अभिषेक कर रहे हों।
जब ‘छत्रीबाड़ी’ बन गया ‘वृंदावन धाम’
इस अनूठे गोपाल नौका विहार महोत्सव के लिए पूरे लॉन को वृंदावन धाम का रूप दिया गया था। बिमला जाजोदिया के कंठ से फूटते मधुर भजनों की तान पर सखियां इस कदर झूम उठीं कि पैर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
इस दिव्य नौका विहार को साकार करने में रंजु पटवारी और रेणु मोदी की कलात्मकता साफ नजर आई। इन्होंने सिर्फ नावें ही नहीं सजाईं, बल्कि रेणु मोदी ने ठाकुर जी के रिझाने के लिए खेल-खिलौने, भोजन और खिलौनों का भी खास इंतजाम किया था। भगवान को छप्पन भोग का महाप्रसाद लगाया गया।
भक्ति के साथ स्वाद का ‘छप्पन भोग’
उत्सव में सिर्फ आंखों और कानों को ही नहीं, बल्कि भक्तों की जीभ को भी तृप्त करने का पूरा इंतजाम था। महोत्सव में सजे लजीज स्टॉलों ने हर किसी का ध्यान खींचा:
- ठंडा-ठंडा: गन्ने का ताजा रस
- तीखा-चटपटा: झालमूड़ी और पापड़ी चाट
- पारंपरिक स्वाद: कढ़ी-कचौरी और कई तरह की लजीज मिठाइयाँ
मेहनत लाई रंग, आरती से हुआ समापन
इस भव्य और लीक से हटकर किए गए आयोजन को सफल बनाने में सरोज मित्तल और कांता मित्तल ने दिन-रात एक कर दिया। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि हर श्रद्धालु भक्ति के रस में सराबोर नजर आया। कार्यक्रम का समापन ठाकुर जी की भव्य महाआरती के साथ हुआ, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने बड़े ही चाव से प्रसाद ग्रहण किया। समिति की ओर से सरोज मित्तल ने इस सफल और यादगार उत्सव की जानकारी साझा की।



