कान्हा के “विवाह हाथ” में खिले सखियों के चेहरे, भक्ति और परंपरा से सजा अनूठा उत्सव
सांवरिया सखी सरोज मित्तल ने बताया कि सभी सखियां जब एक जैसी साड़ी पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं तो उत्सव में चार चांद लग गए। उन्होंने कहा कि अब सभी सखियों पर कान्हा की शादी का रंग चढ़ चुका है और वे पूरे उत्साह के साथ विवाह की तैयारियों में जुट गई हैं।

डिंपल शर्मा,
गुवाहाटी 27 अगस्त 2026/असम.समाचार
कान्हा के विवाह की तैयारियों के बीच सांवरिया सखी समिति की ओर से आयोजित ‘कान्हा का विवाह हाथ’ कार्यक्रम भक्ति, परंपरा, उमंग और सखीभाव का ऐसा अनूठा संगम बना, जिसने सभी को ब्रज की विवाह परंपराओं की याद दिला दी। किरणश्री होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में सखियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कान्हा के विवाह की रस्में निभाईं और पूरा वातावरण कृष्णमय हो उठा।

कार्यक्रम का शुभारंभ कान्हा के प्रथम विवाह की कुंकुम पत्रिका भगवान श्री गणेश को समर्पित कर किया गया। इसके बाद विधि-विधान एवं पारंपरिक विवाह रस्मों के बीच कान्हा का विवाह हाथ संपन्न कराया गया। मूंग बिखेरना, मंगोड़ी चुटना, उखल-मूसल सहित समाज में विवाह के अवसर पर निभाई जाने वाली विभिन्न पारंपरिक रस्मों को सखियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया।
इस अवसर पर सांवरिया सखियों ने मंजू भाभी को चुनरी ओढ़ाकर मायरे की रस्म भी निभाई। कान्हा और राधा के विवाह से जुड़े मधुर भजनों ने वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दिया। भजनों के बीच सखियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

कार्यक्रम का सबसे रोचक और हास्य से भरपूर दौर तब आया, जब दूल्हे पक्ष और दुल्हन पक्ष की सखियों के बीच छेड़छाड़ और हंसी-मजाक का सिलसिला शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा माहौल ठहाकों और उल्लास से गूंज उठा। इसके बाद रील्स, मस्ती और फोटो के दौर ने कार्यक्रम की यादों को और खास बना दिया। सभी सखियों को सुंदर एवं विशेष उपहार भी भेंट किए गए।

अंत में सभी ने स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया।
सांवरिया सखी सरोज मित्तल ने बताया कि सभी सखियां जब एक जैसी साड़ी पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं तो उत्सव में चार चांद लग गए। उन्होंने कहा कि अब सभी सखियों पर कान्हा की शादी का रंग चढ़ चुका है और वे पूरे उत्साह के साथ विवाह की तैयारियों में जुट गई हैं।
उन्होंने बताया कि पिछली बार कान्हा की सगाई की रस्में निभाई गई थीं। इस बार कान्हा ने अपनी मां यशोदा, यानी मंजू पारीक, से विवाह की इच्छा जताई“राधिका गोरी से, बृज की छोरी से, मैया करा दे मेरो ब्याह…” कान्हा की इस मनुहार को मैया यशोदा ने स्वीकार कर लिया है। अब जल्द ही सखियां “कान्हा की बारात लेकर राधा के द्वारे” पहुंचेंगी और गाजे-बाजे के साथ विवाह की रस्में पूरी की जाएंगी।

कार्यक्रम की आयोजक मंजू पारीक के प्रति सखियों ने आयोजन को प्रेम, समर्पण और भव्यता के साथ संपन्न कराने के लिए आभार व्यक्त किया।
सांवरिया सखी समिति का यह आयोजन महज एक विवाह रस्म नहीं, बल्कि कृष्ण भक्ति, ब्रज संस्कृति, सखीभाव और पारंपरिक भारतीय विवाह संस्कारों का जीवंत उत्सव बन गया। कान्हा के विवाह की इस अनूठी तैयारी ने जहां सखियों के बीच उल्लास भर दिया, वहीं पूरे आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि परंपराएं जब प्रेम और भक्ति से जुड़ती हैं, तो वे यादगार उत्सव का रूप ले लेती हैं।



