असम की बाढ़ और कटाव की समस्या को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बड़े बांधों का निर्माण नहीं करने की केंद्र से अपील

राहुल दोले,
जोनाई 12 जुलाई 2026/असम.समाचार
ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के मुख्य सलाहकारसमुज्ज्वल कुमार भट्टाचार्य ने असम की बाढ़ और नदी कटाव (भू-क्षरण) की समस्या को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर-पूर्व के प्राकृतिक संसाधनों को राष्ट्रीय संपत्ति माना जा सकता है, तो इस क्षेत्र की वर्षों पुरानी बाढ़ और कटाव की समस्या को भी राष्ट्रीय समस्या का दर्जा दिया जाना चाहिए।
भट्टाचार्य ने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार को विशेष और दीर्घकालिक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि असम और उत्तर-पूर्व के लोग हर वर्ष बाढ़ और नदी कटाव से भारी नुकसान झेलते हैं, जिससे जनजीवन, कृषि, आवास और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
अरुणाचल प्रदेश में बड़े नदी बांधों के निर्माण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट राय व्यक्त करते हुए कहा कि आईआईटी गुवाहाटी,गुवाहाटी विश्वविद्यालय,डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय तथा असम और उत्तर-पूर्व के अन्य विशेषज्ञों ने बड़े बांधों को लेकर वैज्ञानिक आधार पर अपनी राय और सुझाव दिए हैं। इसलिए केंद्र सरकार को विशेषज्ञों की सलाह का सम्मान करते हुए उसी के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न तो आसू और न ही सरकार इस विषय के विशेषज्ञ हैं, इसलिए विशेषज्ञों की वैज्ञानिक राय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विशेष रूप से बड़े बांधों के निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन, संपत्ति और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी होनी चाहिए।
भट्टाचार्य ने कहा कि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सलाह के अनुसार बड़े नदी बांधों का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह असम और उत्तर-पूर्व के विशेषज्ञों की राय का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक आधार पर निर्णय ले।
उन्होंने यह भी मांग की कि असम और उत्तर-पूर्व की बाढ़ एवं कटाव की समस्या को राष्ट्रीय समस्या घोषित कर उसके स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को हर वर्ष होने वाले भारी नुकसान से राहत मिल सके।



