पूर्वोत्तर में मानवीय पहल: “मेफेयर ग्रुप” और “रतन शर्मा परिवार” ने असम-अरुणाचल मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 15-15 लाख रुपये
अपने बच्चों की इस सहृदयता पर गर्व व्यक्त करते हुए रतन शर्मा ने कहा, "प्राकृतिक आपदाएँ हमें यह सिखाती हैं कि संकट की घड़ी में मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे समय में केवल संवेदनाएँ व्यक्त करना ही नहीं, बल्कि सरकार और समाज के साथ मजबूती से खड़ा रहना भी हमारा कर्तव्य है।" उन्होंने प्रार्थना की कि अरुणाचल प्रदेश के सभी प्रभावित परिवार जल्द ही इस कठिन समय से उबरें और राज्य पुनः विकास व खुशहाली की राह पर आगे बढ़े।

विकास शर्मा,
गुवाहाटी/ईटानगर 8 जुलाई 2026/असम.समाचार
मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए राजस्थान फाउंडेशन (नॉर्थ ईस्ट चेप्टर) के अध्यक्ष रतन शर्मा, उनके परिवार और मेफेयर ग्रुप ने पूर्वोत्तर के दो राज्यों में आपदा राहत के लिए बड़ी सहायता राशि प्रदान की है। संकट की इस घड़ी में समाज और सरकार के साथ खड़े होने के संकल्प के तहत असम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री राहत कोष में कुल 30 लाख रुपये का योगदान दिया गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से की मुलाकात
असम के मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक आत्मीय बैठक के दौरान राजस्थान फाउंडेशन के नॉर्थ ईस्ट सेक्टर के अध्यक्ष रतन शर्मा, राज्यसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय तथा मेफेयर ग्रुप ऑफ होटल्स के सीएमडी हर्ष शर्मा ने माननीय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जी से भेंट की। इस अवसर पर मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मेफेयर ग्रुप की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹15 लाख की सहयोग राशि का चेक सौंपा गया। उपस्थित प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री जी के स्नेह, मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योगदान जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगा।

अरुणाचल के बाढ़ पीड़ितों के लिए भी बढ़ाए हाथ
वहीं दूसरी ओर, अरुणाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए भी शर्मा परिवार आगे आया है। रतन शर्मा के तीनों बेटों हर्ष शर्मा, परवेश शर्मा और देव शर्मा ने अरुणाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री पेमा खांडू जी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु ₹15 लाख की सहायता राशि भेंट की।
अपने बच्चों की इस सहृदयता पर गर्व व्यक्त करते हुए रतन शर्मा ने कहा, “प्राकृतिक आपदाएँ हमें यह सिखाती हैं कि संकट की घड़ी में मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे समय में केवल संवेदनाएँ व्यक्त करना ही नहीं, बल्कि सरकार और समाज के साथ मजबूती से खड़ा रहना भी हमारा कर्तव्य है।” उन्होंने प्रार्थना की कि अरुणाचल प्रदेश के सभी प्रभावित परिवार जल्द ही इस कठिन समय से उबरें और राज्य पुनः विकास व खुशहाली की राह पर आगे बढ़े।



