बरपेटा सत्र का “बरषाफल” असम में फिर बनेगी हेमंत विश्व शर्मा की सरकार
गौरतलब है कि बरपेटा सत्र में हर साल बोहाग के पहले दिन ‘बरषाफल’ सुनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जुटते हैं और इन भविष्यवाणियों को सुनते हैं कई बार ये भविष्यवाणियां सच भी साबित हुई हैं, जिससे लोगों का विश्वास और गहरा होता जा रहा है।

विकास शर्मा,
बरपेटा 15 अप्रैल 2026/असम.समाचार
असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर बरपेटा सत्र से इस बार भी ‘बरषाफल’ ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। बोहाग के पहले दिन जारी इस वार्षिक ज्योतिषीय भविष्यवाणी में सत्ता, समाज और मौसम तीनों को लेकर बड़े संकेत दिए गए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा उस भविष्यवाणी की हो रही है, जिसमें कहा गया है कि असम में एक बार फिर NDA की सरकार बनेगी। इतना ही नहीं, मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के भी संकेत बताए गए हैं। ऐसे में 4 मई को आने वाले चुनाव नतीजों से पहले यह भविष्यवाणी लोगों के बीच खास दिलचस्पी का विषय बन गई है।
बरपेटा सत्र के ज्योतिषी त्रिदीप शर्मा दलोई के मुताबिक, सूर्य और मंगल की स्थिति सत्ता पक्ष के पक्ष में माहौल बना रही है, जिससे भाजपा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार तीसरी बार राज्य में काबिज हो सकती है।
वहीं, छात्रों की राजनीति में सक्रिय अखिल असम छात्र संघ (AASU) के लिए भी अच्छे संकेत बताए गए हैं। सूर्य और बुध की युति से बोहाग के 13वें दिन के बाद संगठन की गतिविधियों में तेजी आने की बात कही गई है।
हालांकि, हर खबर अच्छी नहीं है। आर्थिक मोर्चे पर तस्वीर कुछ फीकी नजर आ रही है। व्यापार, आयात और धन-संपत्ति में खास बढ़ोतरी के संकेत नहीं मिल रहे।
सामाजिक माहौल को लेकर भविष्यवाणी थोड़ी चिंताजनक है। शनि, मंगल, बुध और केतु की स्थिति आमजन के बीच असंतोष, विरोध-प्रदर्शन और अशांति बढ़ा सकती है। सड़क, रेल और हवाई हादसों के साथ-साथ हिंसा, चोरी, लूटपाट और उग्रवादी गतिविधियों में इजाफा होने की आशंका जताई गई है।
राहु के प्रभाव से राजनीतिक नेताओं और चर्चित हस्तियों पर हमलों की भी चेतावनी दी गई है। वहीं, मौसम भी इस साल ‘मूड स्विंग’ में रह सकता है कहीं सूखा, तो कहीं बेमौसम बारिश या ज्यादा बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है।
प्राकृतिक आपदाओं का साया भी बना रह सकता है। चक्रवात, आंधी, बिजली गिरना और भूकंप जैसी घटनाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं।
राजनीतिक स्तर पर भी सब कुछ सहज नहीं दिख रहा। नेताओं के बीच अविश्वास और टकराव बढ़ने के संकेत हैं। साथ ही उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां भी चिंता बढ़ा सकती हैं।
इस साल महंगाई, खाद्य संकट और आर्थिक दबाव आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। साथ ही कुछ प्रमुख नेताओं, मंत्रियों और साहित्यकारों के निधन की भी आशंका जताई गई है।
काल सर्प योग के प्रभाव के चलते देश के लिए यह साल ज्यादा अनुकूल नहीं माना गया है। राहु-केतु की स्थिति के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोट जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है।
गौरतलब है कि बरपेटा सत्र में हर साल बोहाग के पहले दिन ‘बरषाफल’ सुनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जुटते हैं और इन भविष्यवाणियों को सुनते हैं कई बार ये भविष्यवाणियां सच भी साबित हुई हैं, जिससे लोगों का विश्वास और गहरा होता जा रहा है।
नोट:
(यह समाचार बरपेटा सत्र द्वारा जारी वार्षिक ज्योतिषीय ‘बरषाफल’ पर आधारित है। इसमें व्यक्त किए गए विचार एवं भविष्यवाणियाँ संबंधित ज्योतिषी के निजी आकलन हैं। असम समाचार इन दावों या भविष्यवाणियों की पुष्टि या समर्थन नहीं करता है। यह सामग्री केवल पाठकों की जानकारी के लिए प्रकाशित की गई है।)



