“भूखा रहना तपस्या नहीं, मन-वचन-काया का संयम ही सच्चा तप है” मुनि आनंद कुमार ‘कालू’।
धर्मचक्र तप की आराधना से श्रीमती सरोज दुगड़ ने रचा इतिहास, भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित

डिंपल शर्मा,
नगांव, 9 जून 2026/असम.समाचार
तेजपुर की तपस्विनी श्रीमती सरोज दुगड़ द्वारा धर्मचक्र तप की कठिन एवं विरल आराधना पूर्ण कर आध्यात्मिक क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने पर उनके सम्मान में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, नगांव एवं सहयोगी संस्थाओं के तत्वावधान में नगांव स्थित तेरापंथ भवन में भव्य धर्मचक्र तप अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार “कालू” एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ मुनिश्री के महामंत्रोच्चार के साथ हुआ।
इस अवसर पर तपस्विनी श्रीमती सरोज दुगड़ के पुत्र सुमीत दुगड़ एवं पुत्रवधू अनु दुगड़ ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में तपस्या के प्रेरणादायी पहलुओं पर प्रकाश डाला। तेरापंथ सभा नगांव के अध्यक्ष विनोद बोथरा ने तप की महत्ता बताते हुए तपस्विनी बहन के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
दुगड़ परिवार की बहनों ने मधुर गीतिकाओं की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तेरापंथ युवक परिषद नगांव के मंत्री तथा महिला मंडल मंत्री श्रीमती ललिता कोठारी ने भी गीतिका के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते हुए तपस्विनी बहन का अभिनंदन किया। वहीं तेरापंथ महिला मंडल नगांव द्वारा तप अनुमोदना की विशेष गीतिका प्रस्तुत की गई।
मुनि विकास कुमार ने तप अनुमोदना की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अपने मंगल उद्बोधन में मुनि आनंद कुमार ने कहा कि तपस्या आत्मशुद्धि का अमोघ साधन तथा कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने कहा कि तपस्या प्रत्येक व्यक्ति के लिए संभव नहीं होती, यह विरले और दृढ़ संकल्प वाले व्यक्तियों के बस की साधना है।
मुनिश्री ने कहा कि केवल भूखा रहना तपस्या नहीं है, बल्कि मन, वचन और काया को संयमित करते हुए आत्मानुशासन के साथ शरीर को साधना ही वास्तविक तप है। उन्होंने बताया कि श्रीमती सरोज दुगड़ ने मुनि विकास कुमार की प्रेरणा से धर्मचक्र तप की आराधना पूर्ण की है। अपने अदम्य मनोबल और दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने इस कठिन तप को सफलतापूर्वक संपन्न कर आध्यात्मिक साधना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मुनिश्री ने आगे बताया कि तपस्विनी बहन वर्तमान में नौवें वर्षीतप की साधना में लीन हैं तथा कंठी तप जैसी कठिन आराधनाएं भी पूर्ण कर चुकी हैं। उन्होंने श्रीमती सरोज दुगड़ के उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
समारोह के दौरान तेरापंथ सभा, महिला मंडल एवं युवक परिषद द्वारा तपस्विनी बहन का साहित्य एवं गमछा भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन विवेक बोरड़ ने किया, जबकि आभार ज्ञापन श्रीमती ललिता कोठारी ने व्यक्त किया।
धर्मचक्र तप जैसी कठिन साधना को पूर्ण कर श्रीमती सरोज दुगड़ ने न केवल तेजपुर बल्कि पूरे तेरापंथ समाज का गौरव बढ़ाया है। उनका यह आध्यात्मिक पुरुषार्थ साधना पथ पर अग्रसर लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।



