असम में UCC की दस्तक: पूर्वोत्तर का पहला राज्य बना असम, विधानसभा में बिल पास होते ही सियासत गरम
फिलहाल, विधानसभा से बिल पास होने के बाद असम की राजनीति में नया अध्याय खुल गया है और आने वाले दिनों में इस फैसले की गूंज पूरे देश में सुनाई देने की उम्मीद है।

विकास शर्मा,
गुवाहाटी, 27 मई 2026/असम.समाचार(फ़ाइल फ़ोटो)
असम विधानसभा के इतिहास में बुधवार का दिन एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के रूप में दर्ज हो गया, जब 16वीं असम विधानसभा के पहले सत्र में “द यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), असम बिल, 2026” को पारित कर दिया गया। इसके साथ ही असम पूर्वोत्तर भारत का पहला और देश का तीसरा राज्य बन गया है, जिसने विधानसभा में समान नागरिक संहिता कानून को मंजूरी दी है।
विधानसभा में बिल पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे “समान अधिकार और समान कानून” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे सामाजिक और धार्मिक संवेदनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए कई सवाल उठाए।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को आगामी चुनावी रणनीति और राष्ट्रीय राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राजधानी गुवाहाटी से लेकर जिला मुख्यालयों तक इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है। चाय की दुकानों, बाजारों और सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि यह कानून “न्याय, समानता और पारदर्शिता” की भावना को मजबूत करेगा। वहीं विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में UCC लागू होने के बाद पूर्वोत्तर की राजनीति में नया विमर्श शुरू हो सकता है। खासकर जनजातीय, धार्मिक और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं पर इसके प्रभाव को लेकर अब बहस और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, विधानसभा से बिल पास होने के बाद असम की राजनीति में नया अध्याय खुल गया है और आने वाले दिनों में इस फैसले की गूंज पूरे देश में सुनाई देने की उम्मीद है।



