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मातृ मृत्यु पर असम का बड़ा प्रहार! संक्रमण से होने वाली मौतों में भारी गिरावट, 21 फीसदी से घटकर 8 फीसदी पर पहुंचा आंकड़ा

मां और नवजात की सुरक्षा के लिए असम के हेल्थ मॉडल की केंद्र ने की सराहना, अब दूसरे राज्यों को भी सिखाएगा संक्रमण नियंत्रण का तरीका

विकास शर्मा,

गुवाहाटी, 7 नवंबर 2026/असम.समाचार

 

मां बनने का सफर किसी महिला के लिए जिंदगी का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है, लेकिन प्रसव के दौरान होने वाला संक्रमण कई बार इसी खुशी को मातम में बदल देता है। असम ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसी चुनौती से लड़ते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य में संक्रमण यानी सेप्सिस के कारण होने वाली मातृ मृत्यु का हिस्सा जुलाई 2026 के 21 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर 2026 में महज 8 प्रतिशत रह गया है।
असम की इस उपलब्धि ने अब राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य के संक्रमण नियंत्रण मॉडल को दूसरे राज्यों के साथ साझा करने के लिए असम को आमंत्रित किया है। खास तौर पर उन राज्यों को असम के अनुभव से सीखने का अवसर मिलेगा, जहां सेप्सिस के कारण मातृ मृत्यु के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।

 

इस सफलता के पीछे राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं में संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण को लेकर किए गए प्रयासों को अहम माना जा रहा है। असम सरकार ने माताओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। इसके साथ ही Infection Prevention and Control Mechanism (IPCM) नामक डिजिटल मॉनिटरिंग पोर्टल भी शुरू किया गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल ने 25 सितंबर 2026 को डिब्रूगढ़ में आयोजित मातृ मृत्यु दर में कमी, शिशु मृत्यु दर में कमी और संक्रमण नियंत्रण पर राज्य स्तरीय सम्मेलन के दौरान इन दोनों पहलों का औपचारिक शुभारंभ किया था।

 

इन SOPs के माध्यम से अस्पतालों के लेबर रूम, प्रसूति ऑपरेशन थिएटर, प्रसवोत्तर वार्ड, स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) और नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (NBSU) में साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण के लिए एक समान मानक निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य अस्पतालों में होने वाले संक्रमण को कम करना और प्रसूता महिलाओं तथा नवजात शिशुओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

इस पूरी व्यवस्था में डिजिटल मॉनिटरिंग पोर्टल की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। इसके जरिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सफाई व्यवस्था से लेकर चिकित्सा उपकरणों के संक्रमण मुक्त किए जाने तक की निगरानी की जा रही है। लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर की दैनिक सफाई के फोटोग्राफिक प्रमाण, जियो-टैग तस्वीरों के माध्यम से ऑटोक्लेव की गुणवत्ता जांच, माइक्रोबियल सर्विलांस और अस्पतालों की संक्रमण नियंत्रण समितियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।

 

इस डिजिटल व्यवस्था से स्वास्थ्य संस्थानों में कमियों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी। साथ ही अस्पतालों की जवाबदेही और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने इस उपलब्धि के लिए डॉक्टरों, नर्सों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सरकार संक्रमण की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार की व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
असम के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मातृ मृत्यु के एक बड़े कारण पर नियंत्रण की दिशा में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। अब असम का यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

एक मां की जान बचाना केवल चिकित्सा व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। असम की यह पहल सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

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