सफेद जहर का बाजार! त्योहारों में धड़ल्ले से बिक रहा नकली पनीर और घी
हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से आने वाले कुछ संदिग्ध उत्पादों को लेकर सवाल, त्योहारों में बढ़ जाती है खपत

विकास शर्मा,
गुवाहाटी 28 सितंबर 2026/असम.समाचार
त्योहारों का मौसम आते ही मिठाइयों और दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ जाती है और इसी मांग के साथ बाजार में कथित मिलावटी पनीर, नकली दूध और संदिग्ध घी की आपूर्ति का खेल भी तेज होने की शिकायतें सामने आती हैं। असम के गुवाहाटी, नगांव, बरपेटा, डिब्रूगढ़, जोरहाट, तिनसुकिया और सोनितपुर समेत कई जिलों के बाजारों में ऐसे उत्पादों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जाता है कि कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ कारोबारी कथित तौर पर दूध के बजाय सस्ते पाउडर और अन्य गैर-दुग्ध सामग्री से दूध जैसा उत्पाद तैयार करते हैं। इसी से आगे पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। बाजार में आने वाले कुछ उत्पादों को हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की नामी कंपनियों के नाम और पैकेजिंग से जोड़कर भी दावे किए जाते हैं। हालांकि, किसी विशेष कंपनी के उत्पाद को नकली या मिलावटी बताने के लिए प्रयोगशाला जांच और आधिकारिक कार्रवाई जरूरी है।
सफेद पाउडर से सफेद दूध तक!
मामला केवल पनीर तक सीमित नहीं बताया जा रहा। कथित तौर पर कुछ स्थानों पर रासायनिक पदार्थों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल कर दूध जैसा उत्पाद तैयार करने की शिकायतें हैं। यही उत्पाद आगे पनीर, खोया और अन्य खाद्य सामग्री में इस्तेमाल होने की आशंका जताई जाती है।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि मिलावटी उत्पाद की वास्तविक संरचना केवल देखकर निर्धारित नहीं की जा सकती। FSSAI के अनुसार खाद्य पदार्थों में मिलावट और संदूषण की पहचान के लिए परीक्षण जरूरी है तथा दूध और दूध उत्पादों की नियमित निगरानी की व्यवस्था मौजूद है।
नकली घी भी सवालों के घेरे में
पनीर के साथ घी के बाजार पर भी नजर रखने की जरूरत है। FSSAI ने स्वयं वनस्पति तेल की मिलावट को घी में पाई जाने वाली एक प्रमुख मिलावट के रूप में चिन्हित किया है और इसके लिए परीक्षण की व्यवस्था बताई है।
त्योहारों में मांग बढ़ने के कारण दूध, पनीर, खोया और घी जैसे उत्पादों में मिलावट का आर्थिक प्रलोभन बढ़ सकता है। इसी कारण FSSAI ने राज्यों को विशेष त्योहार-रोधी मिलावट अभियान चलाने, संवेदनशील बाजारों में निरीक्षण और नमूने लेने तथा जरूरत के अनुसार मौके पर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
सेहत से खिलवाड़ का खतरा
मिलावटी या असुरक्षित दूध उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता पैदा कर सकता है। उत्पाद में इस्तेमाल किए गए संदिग्ध रसायन, गैर-खाद्य पदार्थ, दूषित सामग्री या अत्यधिक मात्रा में अनुपयुक्त वसा शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। दूषित खाद्य पदार्थों से पेट संबंधी परेशानी, उल्टी-दस्त और खाद्य विषाक्तता जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि कुछ संदूषक लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए अधिक गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
यही वजह है कि केवल पनीर का सफेद, मुलायम या देखने में आकर्षक होना उसकी गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। FSSAI की खाद्य जांच व्यवस्था में माइक्रोबायोलॉजिकल रोगजनक, भारी धातु, रासायनिक संदूषक और अन्य मिलावटों की जांच शामिल है।
कार्रवाई से पहले सवाल,नमूने कहां हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन बाजारों में ऐसे उत्पादों की शिकायतें सामने आ रही हैं, वहां नियमित नमूना संग्रह और प्रयोगशाला जांच कितनी हो रही है? क्या त्योहारों से पहले दूध, पनीर, खोया और घी के थोक विक्रेताओं तथा संदिग्ध प्रतिष्ठानों की विशेष जांच की जा रही है?
प्रशासनिक स्तर पर किसी अधिकारी या विभाग की मिलीभगत का आरोप तभी प्रमाणित माना जा सकता है जब उसके समर्थन में जांच, दस्तावेज या आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध हों। लेकिन यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए पारदर्शी सैंपलिंग, प्रयोगशाला जांच और कार्रवाई के परिणाम सार्वजनिक करना जरूरी हो जाता है।



