जब सखियों ने रचाया कान्हा का ब्याह, एक साथ सजे 50 लड्डू गोपालों ने बिखेरी भक्ति की छटा

डिंपल शर्मा,
गुवाहाटी, 4 सितंबर 2026/असम.समाचार
आमतौर पर विवाह में दूल्हा-दुल्हन होते हैं, बारात होती है और मंगल गीत गूंजते हैं, लेकिन गुवाहाटी में एक ऐसा अनोखा विवाह समारोह देखने को मिला, जहां दूल्हा बने स्वयं लाड़ले कान्हा। सांवरिया सखी समिति की सखियों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा का दिव्य विवाह पूरे प्रेम, श्रद्धा और सखीभाव के साथ संपन्न कराया। अथगांव स्थित परशुराम सेवा सदन में आयोजित इस अनूठे विवाह समारोह में भक्ति, संगीत, नृत्य और पारिवारिक अपनत्व का अद्भुत संगम देखने को मिला।
एक वर्ष पहले सखियों ने अपने लाड़ले कृष्ण की सगाई का उत्सव बड़े प्रेम और उल्लास से मनाया था। देखते ही देखते एक वर्ष बीत गया और 27 तारीख को आठगांव के किरणश्री होटल में कृष्ण के ब्याह की रस्में शुरू हुईं। इसके बाद 2 अगस्त को परशुराम सेवा सदन में कृष्ण-राधा का भव्य और दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
समारोह की शुरुआत श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से हुई। इसके बाद सखियों ने मेहंदी और हल्दी की रस्में पूरे उत्साह के साथ निभाईं। 300 से अधिक सखियां और श्रद्धालु इस अनोखे आयोजन के साक्षी बने। मंगल गीतों, हंसी-खुशी और भक्ति के रंग में रंगा पूरा वातावरण मानो ब्रजधाम में बदल गया।
विवाह समारोह का सबसे भाव-विभोर कर देने वाला क्षण राधा-कृष्ण का दिव्य विवाह रहा। कथावाचक पूज्य प्रियांशु जी महाराज ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से विवाह की रस्में संपन्न कराईं। उनकी कथा और भक्ति भाव से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। उपस्थित श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव हुआ मानो स्वयं राधा-कृष्ण उनके बीच विराजमान हों।
समारोह में सांवरिया सखी समिति की सखियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। भक्ति गीतों पर हुए नृत्य और संगीत ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। आयोजक मंजू पारिक के परिवारजन, समिति की सखियां, उनके पति और अन्य अतिथि भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
इस विवाह समारोह का सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला, जब सांवरिया सखी समिति की सखियां अपने-अपने लड्डू गोपाल को एक जैसी सुंदर पोशाक में सजाकर लेकर पहुंचीं। आयोजक मंजू पारिक के परिवार की ओर से भी करीब 50 लड्डू गोपाल विशेष श्रृंगार के साथ विराजमान किए गए। एक साथ सजे इतने लड्डू गोपालों का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया।
सभी लड्डू गोपालों के समक्ष चौकी, पानी की घंटी और प्रसाद की बाटी श्रद्धापूर्वक रखी गई थी। पूरा परिसर कान्हा की भक्ति में ऐसा रंगा नजर आया कि समारोह में शामिल हर व्यक्ति इस दिव्य दृश्य को निहारता रह गया।
आयोजन की सफलता में सरोज मित्तल का भी विशेष योगदान रहा। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समिति की ओर से उनके समर्पण और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया।
समारोह के दौरान आयोजक मंजू पारिक की ओर से समिति से जुड़े पुरुष सदस्यों को बधाई दी गई और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सभी ने प्रेम और आत्मीयता के साथ भोजन-प्रसाद ग्रहण किया।
सांवरिया सखी समिति का यह आयोजन महज धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, सखीभाव और पारिवारिक आत्मीयता का अनूठा उत्सव बन गया।
समारोह में मौजूद हर सखी के चेहरे पर एक ही भाव दिखाई दे रहा था—“आज हमारे लाड़ले कान्हा का ब्याह है।”
यह दिव्य विवाह महोत्सव अपने अनोखे अंदाज और भक्ति के भाव के कारण उपस्थित लोगों के लिए एक ऐसी यादगार स्मृति बन गया, जिसे वे लंबे समय तक अपने हृदय में संजोकर रखेंगे।



