नगांव-अजब-गजब: जवानी में ‘नेताजी’ बने, लेकिन बचपन की भूल ने छीन ली कुर्सी!
नगांव जिले के बगरीगुड़ी विकास खंड के अंतर्गत आने वाले महेरीपार गांव पंचायत के वार्ड नंबर 4 से अजीजुर रहमान चुनाव जीतकर वार्ड सदस्य बने थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन उन पर चुनाव के दौरान दस्तावेज में हेरफेर करने के आरोप लगे। जब शिकायत के आधार पर जिला आयुक्त के निर्देश पर जांच शुरू हुई, तो जो सच निकलकर आया उसने सभी को हैरान कर दिया।

डिंपल शर्मा,
नगांव, 22 जुलाई 2026/असम.समाचार
कहते हैं कि “कानून के हाथ लंबे होते हैं और पुराने से पुराने पन्ने भी एक दिन खुल ही जाते हैं।” असम के नगांव जिले से एक ऐसा ही अनोखा मामला सामने आया है, जहाँ एक जन-प्रतिनिधि को अपनी पुरानी ‘नादानी’ यानी बाल विवाह की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। बचपन में हुई शादी और पिता बनने के एक पुराने रिकॉर्ड ने आज उनकी पंचायती कुर्सी छीन ली।

क्या है पूरा मामला?
नगांव जिले के बगरीगुड़ी विकास खंड के अंतर्गत आने वाले महेरीपार गांव पंचायत के वार्ड नंबर 4 से अजीजुर रहमान चुनाव जीतकर वार्ड सदस्य बने थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन उन पर चुनाव के दौरान दस्तावेज में हेरफेर करने के आरोप लगे। जब शिकायत के आधार पर जिला आयुक्त के निर्देश पर जांच शुरू हुई, तो जो सच निकलकर आया उसने सभी को हैरान कर दिया।

कागजों में खुला ‘बचपन का राज’
जांच में जब अजीजुर रहमान के जन्म और परिवार से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला गया, तो पता चला कि:
- जन्म तिथि: 31 जनवरी 1999
- पहला बच्चा: 7 अगस्त 2016
यानी मात्र 17 साल की उम्र में ही अजीजुर एक बच्चे के पिता बन चुके थे! भारतीय कानून के मुताबिक 21 वर्ष से कम उम्र के पुरुष का विवाह बाल विवाह (Child Marriage) की श्रेणी में आता है। दस्तावेज फर्जी पाए गए और यह साफ हो गया कि उन्होंने कम उम्र में शादी की थी।
जिला आयुक्त का कड़ा फैसला: कुर्सी रद्द!
सहायक आयुक्त, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और खंड विकास अधिकारी (BDO) की जांच रिपोर्ट में जब बाल विवाह और जालसाजी का सच साबित हुआ, तो जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत प्रभाव से अजीजुर रहमान की सदस्यता रद्द कर दी। फिलहाल इस वार्ड को पूरी तरह से ‘रिक्त’ (खाली) घोषित कर दिया गया है।
समाज के लिए बड़ा संदेश:
यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को ‘पुरानी या सामान्य बात’ समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कानून की नजर में सामाजिक कुरीतियां और धोखाधड़ी कभी पुरानी नहीं होतीं। अगर आप आज किसी जनप्रतिनिधि के पद पर बैठकर समाज को दिशा देने का दावा करते हैं, तो आपका अतीत भी कानून के दायरे में होना चाहिए। बाल विवाह न केवल एक बच्चे का भविष्य बर्बाद करता है, बल्कि आगे चलकर आपकी अपनी तरक्की और सम्मान के रास्ते भी बंद कर सकता है।



