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वही मानसून, वही तबाही, वही प्रशासनिक लापरवाही: जोरबाट में फिर बनी ‘कृत्रिम बाढ़’ की बंधक जनता

नेताओं के वादे सूखे, जोरबाट के दोनों नेशनल हाईवे डूबे; आखिर कब जागेगी सरकार?

विकास शर्मा,

जोराबाट 17 जुलाई 2026/असम.समाचार

अगर आप ऊपरी या निचले असम जाने के लिए जोरबाट का रुख कर रहे हैं, तो रुकिए! अपनी गाड़ी को गैराज में डालिए और नाव की बुकिंग कर लीजिए। जी हां, मेघराज की जरा सी मेहरबानी क्या हुई, जोरबाट का ९ माइल और १० माइल इलाका एक बार फिर ‘वेनिस’ बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग ६ (NH-6) और राष्ट्रीय राजमार्ग २७ (NH-27) पर पानी का ऐसा सैलाब है कि मानो हाईवे नहीं, कोई समंदर बह रहा हो। नतीजा? ऊपरी और निचले असम को जोड़ने वाली इस लाइफलाइन पर गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं और मीलों लंबा जाम लग चुका है।

अब तो आदत सी है!

इस इलाके के लोगों के लिए यह कोई नई आफत नहीं है। यहां के बाशिंदों के लिए हर मानसून में ‘कृत्रिम बाढ़’ (आर्टिफिशियल फ्लडिंग) का दीदार करना अब नियति बन चुका है। साल दर साल, हर बारिश में यह महत्वपूर्ण हाईवे तालाब में तब्दील हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि हर बार की इस भयंकर दुर्दशा के बावजूद प्रशासन और सरकार गहरी नींद में सोए नजर आते हैं।

जनता का सवाल: कब जागेगी सरकार?

स्थानीय लोगों का गुस्सा अब फूटने लगा है। हर साल करोड़ों का टैक्स देने वाली जनता पूछ रही है कि आखिर सरकार को इस ड्रेनेज सिस्टम और नेशनल हाईवे की सुध लेने का वक्त कब मिलेगा? क्या हर बार सिर्फ ‘प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है’ का बयान जारी कर खानापूर्ति कर दी जाएगी, या कोई स्थायी समाधान भी निकलेगा?

 

फिलहाल, जब तक सरकार की नींद खुलती है और पानी उतरता है, तब तक प्रशासन ने यात्रियों को इस रूट पर न जाने और बेहद सतर्क रहने की ‘कागजी’ चेतावनी जारी कर दी है।

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