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फेंसिंग के पार भारत: अशोक सिंघल ने सुनी सरहद के साए में जी रहे ग्रामीणों की दास्तां

जहां शाम ढलते ही थम जाती है जिंदगी, उस सीमांत गांव की पीड़ा सुनने पहुंचे अशोक सिंघल

विकास शर्मा,

(असम.समाचार स्पेशल)

धुबड़ी, 11 जून 2026/असम.समाचार

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित असम के धुबड़ी जिले का भोगडांगा गांव एक ऐसा अनोखा भारतीय गांव है, जो सीमा फेंसिंग के उस पार बसा हुआ है। गुरुवार को असम सरकार के मंत्री अशोक सिंघल ने गांव का दौरा कर वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं का जायजा लिया और उनके साथ सीधे संवाद किया।

 

ग्रामीणों के अनुसार, भोगडांगा में करीब 140 भारतीय परिवार रहते हैं, जो वर्षों से मूलभूत सुविधाओं की कमी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

गांव तक पहुंचने के लिए सीमा क्षेत्र का गेट प्रतिदिन सुबह छह बजे खोला जाता है और शाम करीब सात बजे बंद कर दिया जाता है। इसके बाद गांव के लोगों की आवाजाही पूरी तरह रुक जाती है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।

दौरे के दौरान ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है तथा शुद्ध पेयजल और बेहतर विद्युत व्यवस्था की भी आवश्यकता है। उनका कहना था कि किसी के बीमार होने पर समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गांव में पुलिस चौकी नहीं होने के कारण रात के समय असुरक्षा का माहौल बना रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार सीमा पार से आने वाले असामाजिक तत्व मवेशियों की चोरी कर बांग्लादेश की ओर भाग जाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

इस दौरान गांव के छात्रों ने भी मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। छात्रों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) से अनुमति लेकर सीमा गेट से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने सरकार से उन्हें गोलकागंज क्षेत्र में पुनर्वासित करने की भी मांग की।

ग्रामीणों ने गांव में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित करने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग उठाई।

मंत्री अशोक सिंघल ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता है तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

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