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बरामदे में बैठा था ‘मौत का मेहमान’!मरियानी के डेकागांव में भालू का आतंक,

बांस के झुरमुट में छिपा विशालकाय वन्यजीव, घंटों चले हाई-वोल्टेज रेस्क्यू के बाद ट्रेंकुलाइज

केशव पारीक,

मरियानी 20 मई 2026/असम.समाचार

ऊपरी असम के जोरहाट जिले के मरियानी इलाके में मंगलवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब लोगों की नींद खुली तो गांव में किसी इंसान नहीं बल्कि एक विशालकाय भालू की मौजूदगी से। डोकलंगिया डेका गांव में रहने वाले मुकुल सईकिया के घर के बरामदे पर अचानक पहुंचे इस जंगली मेहमान ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।

बताया जाता है कि भालू घर के सामने लगे घने बांस के झुरमुट के नीचे दीवार के कोने में छिपकर बैठ गया था। देखते ही देखते गांव में “भालू आया… भालू आया…” की चीख-पुकार मच गई। महिलाएं और बच्चे घरों में दुबक गए, जबकि आसपास के लोग दूर से मोबाइल कैमरों में इस खौफनाक नजारे को कैद करने लगे।

स्थानीय निवासी मुकुल सईकिया ने बताया कि जैसे ही वह सुबह बरामदे की ओर पहुंचे, सामने विशाल भालू को देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत पड़ोसियों और वन विभाग को सूचना दी। घटना मरियानी थाना क्षेत्र के डोकलंगिया डेका गांव में सिंटेक्स फैक्ट्री के पीछे स्थित उनके घर की है।

सूचना मिलते ही काजीरंगा नेशनल पार्क से वन विभाग की स्पेशल रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। कई घंटों तक चले ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने बेहद सावधानी के साथ भालू को ट्रेंकुलाइज किया। इसके बाद टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से काबू में कर लिया।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान गांव में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर किसी की नजर उस बांस के झुरमुट पर टिकी थी, जहां भालू छिपा बैठा था। इलाके में डर का माहौल तब तक बना रहा, जब तक वन विभाग ने भालू को पकड़ नहीं लिया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन पूरी तरह सुरक्षित रहा। न तो किसी ग्रामीण को नुकसान पहुंचा और न ही भालू को कोई चोट आई। अधिकारियों के अनुसार यह भालुओं के प्रजनन और स्थान परिवर्तन का समय है, इसलिए वे अक्सर जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। पकड़ा गया भालू नर बताया जा रहा है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि सोमवार को जोरहाट जिले में भालू की मूवमेंट की सूचना मिली थी। हालांकि यह वही भालू है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं की जा सकती। फिलहाल उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद तय होगा कि भालू को काजीरंगा नेशनल पार्क या किसी अन्य सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।

इधर, ग्रामीणों का कहना है कि मरियानी और आसपास के इलाकों में जंगली जानवरों का मानव बस्तियों में घुसना अब आम बात बनती जा रही है। लोगों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

यह घटना एक बार फिर असम में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने लाती है, जहां जंगल सिमट रहे हैं और जंगली जानवर आबादी की ओर बढ़ते जा रहे हैं।

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