“कांग्रेस का एकमात्र मकसद येन-केन-प्रकारेण सत्ता पाना”: असम के मंत्री अशोक सिंघल का तीखा हमला
अशोक सिंघल ने कहा, “कांग्रेस किसी के साथ नहीं है और न ही वह देश या जनता का भला चाहती है। कांग्रेस की एकमात्र चिंता केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी हैं।” उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित करके कांग्रेस देश के विकास में बाधक बन रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशहित के बड़े फैसले लिए जा रहे हैं।

राजा शर्मा,
धुबरी 14 अगस्त 2026/असम.समाचार
असम सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया और पूर्वोत्तर में शांति, विकास तथा अतिक्रमण मुक्त अभियान को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है, उसका एकमात्र उद्देश्य “येन-केन-प्रकारेण” और षड्यंत्र करके सिर्फ सत्ता हासिल करना है।
कांग्रेस पर तीखा हमला: केवल सोनिया और राहुल की चिंता
अशोक सिंघल ने कहा, “कांग्रेस किसी के साथ नहीं है और न ही वह देश या जनता का भला चाहती है। कांग्रेस की एकमात्र चिंता केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी हैं।” उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित करके कांग्रेस देश के विकास में बाधक बन रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशहित के बड़े फैसले लिए जा रहे हैं।
अतिक्रमण मुक्त अभियान: 5 लाख के वादे पर 7.5 लाख बीघा मुक्त कराने का लक्ष्य
राज्य में चल रहे भूमि बेदखली (अतिक्रमण मुक्त) अभियान पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार जनता से किए गए वादों से बढ़कर काम करती है:
- रोजगार: सरकार ने 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, जबकि अब तक 1.64 लाख लोगों को रोजगार दिया जा चुका है।
- भूमि मुक्ति: सरकार ने 5 लाख बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का संकल्प लिया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में कम से कम 7.5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
पूर्वोत्तर में खत्म हुआ उग्रवाद और अलगाववाद
पूर्वोत्तर के बदलते माहौल पर बात करते हुए सिंघल ने कहा कि कभी पूरा उत्तर-पूर्वांचल उग्रवाद और अलगाववाद की चपेट में था। लेकिन पीएम मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रयासों से हथियार उठाने वाले संगठनों के साथ शांति समझौते हुए और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया गया। आज असम समेत अन्य राज्यों में अलगाववाद लगभग समाप्त हो चुका है।
‘हर घर तिरंगा’ और ‘वंदे मातरम’ से बढ़ी राष्ट्रप्रेम की भावना
उन्होंने कहा कि अब पूर्वोत्तर और दिल्ली के बीच की दूरियां मिट चुकी हैं और लोगों में देशप्रेम की गहरी भावना जगी है। लोग हाथों में तिरंगा लेकर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे लगा रहे हैं। लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि जिस नारे को लगाते हुए हजारों स्वतंत्रता सेनानी फांसी के फंदे पर झूल गए थे, उसका सम्मान होना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।



