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धुबरी में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनी जलझूलनी एकादशी, निकली भव्य शोभायात्रा

सत्यनारायण और सीताराम ठाकुरबाड़ी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, ​पालकी में सवार होकर निकले बालगोपाल, ब्रह्मपुत्र नदी में कराया गया पवित्र स्नान

राजा शर्मा,

धुबरी, 22 सितंबर 2026/असम.समाचार

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के पावन अवसर पर आज सीमावर्ती शहर धुबरी में जलझूलनी एकादशी का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस उपलक्ष्य में स्थानीय सत्यनारायण ठाकुरबाड़ी और सीताराम ठाकुरबाड़ी में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

​दोपहर बाद ठाकुरबाड़ी परिसरों से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप ‘बालगोपाल’ को नयनाभिराम फूलों से सजी पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। नगर भ्रमण के दौरान पूरा शहर “हरे कृष्ण-हरे राम” और हरि नाम संकीर्तन के जयकारों से गुंजायमान रहा। इसके उपरांत बालगोपाल को ब्रह्मपुत्र नदी के पावन तट पर ले जाकर विधिवत पवित्र स्नान संस्कार संपन्न कराया गया।

परिवर्तनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जलझूलनी एकादशी को ‘परिवर्तनी एकादशी’ और ‘डोल ग्यारस’ के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि चातुर्मास की योगनिद्रा के दौरान इस दिन भगवान विष्णु शयनावस्था में करवट बदलते हैं। इस दिन भगवान के विग्रह को पालकी में बैठाकर जलाशय या नदी तक ले जाकर स्नान कराने की प्राचीन परंपरा है, जिसके चलते इसे जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

​उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने दिनभर निर्जला व फलाहार व्रत रखकर भगवान श्रीहरि की आराधना की तथा समस्त मानव जाति के कल्याण, विश्व शांति और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ इस पावन अनुष्ठान का समापन हुआ।

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