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नगांव लोकसभा उपचुनाव: त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा सियासी पेंच, अजमल की एंट्री से समीकरण रोचक

डिंपल शर्मा,
नगांव 24 सितंबर 2026/असम.समाचार
असम की हाई-प्रोफाइल नगांव संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनाव का सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर अब मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय रूप ले चुका है। इस चुनावी दंगल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) देवाशीष शर्मा को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक शिवामोनी बोरा पर भरोसा जताया है।
वहीं एआईयूडीएफ सुप्रीमो बदरुद्दीन अजमल के खुद चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला पूरी तरह रोमांचक हो गया है।
देवाशीष शर्मा (बीजेपी): नगांव के पूर्व उपायुक्त रहे देवाशीष शर्मा ने हाल ही में प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति का दामन थामा है। जिले में उनकी प्रशासनिक छवि, विकास कार्यों की पकड़ और सत्ताधारी दल के सांगठनिक ढांचे के बल पर भाजपा इस बार यहां कमल खिलाने की रणनीति पर काम कर रही है।
शिवामोनी बोरा (कांग्रेस): बटाद्रोबा की पूर्व विधायक और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय गुलाब बोरबोरा के परिवार से जुड़ी शिवामोनी बोरा की स्थानीय स्तर पर मजबूत पैठ मानी जाती है। कांग्रेस पारंपरिक मतों के साथ-साथ सत्ता-विरोधी लहर को अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास कर रही है।
बदरुद्दीन अजमल (एआईयूडीएफ): धुबरी के पूर्व तीन बार के सांसद और वर्तमान विधायक बदरुद्दीन अजमल के नगांव से लड़ने के फैसले ने चुनावी गणित को उलझा दिया है। अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में एआईयूडीएफ का अपना आधार वोट बैंक है, जिससे मुकाबला दोतरफा न रहकर त्रिकोणीय बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगांव सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रहती है। बदरुद्दीन अजमल की मौजूदगी सीधे तौर पर कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यदि कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच वोटों का बिखराव होता है, तो इसका सीधा लाभ भाजपा के खाते में जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस यह संदेश देने में जुटी है कि केवल वही भाजपा को सीधी टक्कर दे सकती है।
चुनावी बिगुल बजते ही तीनों खेमों ने जनसंपर्क और रैलियों का दौर तेज कर दिया है, जिससे नगांव का उपचुनाव अब राज्य की सबसे चर्चित सियासी जंग बन चुका है।


