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मोह-माया त्याग कर निरंतर विहार करना ही संत जीवन की पहचान : मुनि आनंद कुमार ‘कालू’

समारोह में वक्ताओं ने मुनि आनंद कुमार ‘कालू’ के सरल, प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके प्रति मंगल भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम श्रद्धा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बनकर संपन्न हुआ।

डिंपल शर्मा,
नगांव 15 जून 2026/असम.समाचार
नगांव स्थित तेरापंथ भवन में तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य आचार्य महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार ‘कालू’ एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार के पावन सान्निध्य में मंगल भावना समारोह श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, नगांव तथा सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री के मंगल महामंत्रोच्चार से हुआ। इसके पश्चात मुनि विकास कुमार ने भावपूर्ण गीतिका प्रस्तुत कर आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
अपने प्रेरणादायी प्रवचन में मुनि आनंद कुमार ‘कालू’ ने कहा कि संतों का जीवन निरंतर गतिशीलता और त्याग का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार बहता हुआ जल निर्मल रहता है, उसी प्रकार संतों को भी मोह और माया का त्याग कर सदैव विहाररत रहना चाहिए। रमता साधु ही समाज को जागृति और धर्म का संदेश दे सकता है।”
मुनिश्री ने व्यक्तित्व निर्माण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को केश के समान कोमल, मोमबत्ती की तरह प्रकाशमान, सुई की तरह जोड़ने वाला तथा कंघी की तरह उलझनों को सुलझाने वाला बनना चाहिए। उन्होंने समाज की विभिन्न संस्थाओं से परस्पर सहयोग एवं एकरूपता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि साधु-साध्वियां, श्रावक-श्राविकाएं धर्मसंघ के अभिन्न अंग हैं। जिस प्रकार आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार धर्मसंघ की शोभा साधु-साध्वियों से बढ़ती है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की आराधना प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।
मुनिश्री ने जैन साधु-संतों की विहार परंपरा एवं चातुर्मास की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्षा ऋतु में साधु-संत एक स्थान पर स्थिर रहकर धर्म आराधना करते हैं, जबकि शेष समय लोककल्याण हेतु विहार करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि गुरु आज्ञा से गुवाहाटी चातुर्मास की ओर मंगल विहार करते हुए उनका नगांव प्रवास सम्पन्न हुआ है।
समारोह के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने परस्पर क्षमायाचना कर सद्भाव एवं आत्मशुद्धि का संदेश दिया। मुनिश्री ने तेरापंथ भवन में हुए 12 दिवसीय प्रवास को समाज के लिए प्रेरणादायी एवं यादगार बताते हुए जैन एकता के नए आयाम स्थापित होने की बात कही।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा अध्यक्ष विनोद बोथरा, गुवाहाटी से समागत नव निर्वाचित अध्यक्ष रितेश खट्टर, महिला मंडल अध्यक्षा संगीता चोरड़िया, तेयुप अध्यक्ष पीयूष पुगलिया, मंत्री अमित दुगड़, निवर्तमान अध्यक्ष जीवनमल सुराणा, उपाध्यक्ष मोहनलाल नाहटा एवं रमेश सुराणा, पूर्व अध्यक्ष प्रमोद कोठारी, उपासिका सरला गुजरानी तथा ज्ञानशाला प्रशिक्षिका डिंपल दुगड़ सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने मंगल भावना गीत प्रस्तुत किया, वहीं ज्ञानशाला के बच्चों ने अर्हम् वंदना, नमस्कार मुद्रा तथा आचार्य महाप्रज्ञ एवं आचार्य महाश्रमण के व्यक्तित्व पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में तेरापंथ युवक परिषद, गुवाहाटी के नवमनोनीत अध्यक्ष रोहित सुराणा का भी सम्मान किया गया। समारोह का संचालन सभा मंत्री विवेक बोरड़ ने किया तथा आभार संगठन मंत्री दिलीप बोकाड़िया ने व्यक्त किया।
समारोह में वक्ताओं ने मुनि आनंद कुमार ‘कालू’ के सरल, प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके प्रति मंगल भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम श्रद्धा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बनकर संपन्न हुआ।

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