नगांव के”किशन-इंदिरा फाउंडेशन” की अनूठी पहल: बाढ़ के संकट में शिवसागर और जोरहाट के साथ खड़ा हुआ पूरा असम
"हमेशा बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ा रहेगा फाउंडेशन": पियूष रूठिया

केशव पारीक,
शिवसागर/जोरहाट 27 जुलाई 2026/असम.समाचार
असम में जब-जब कुदरत का कहर टूटता है, तब तबाही के बीच से ही इंसानियत की सबसे खूबसूरत तस्वीरें भी सामने आती हैं। ऐसी ही एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है नगाँव का किशन इंदिरा फाउंडेशन। बाढ़ से बेघर हुए परिवारों की मदद के लिए संस्था पूरी निष्ठा के साथ मैदान में उतरी है।
”हमेशा बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ा रहेगा फाउंडेशन”: पियूष रूठिया
संस्था की इस निस्वार्थ सेवा यात्रा पर बात करते हुए समाजसेवक पियूष रूठिया ने किशन इंदिरा फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा:
“समाज सेवा और बाढ़ प्रभावित भाई-बहनों की मदद करना हमारा परम कर्तव्य है। किशन इंदिरा फाउंडेशन अपनी ओर से हर संभव सहयोग देने के लिए हमेशा तत्पर रहा है और आगे भी इसी तरह हर मोर्चे पर मदद के लिए खड़ा रहेगा।”
शिवसागर और जोरहाट के साथ खड़ा है समूचा असम
इस कठिन आपदा के समय में पूरा असम, राज्य सरकार और स्थानीय लोग एक साथ मिलकर इस चुनौती का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित शिवसागर जिले और जोरहाट जिले के नागरिकों को यह विश्वास दिलाया जा रहा है कि वे इस दुख की घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा समाज और सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
जमीनी स्तर पर पहुँचाई जा रही राहत
बाढ़ के बाद पैदा होने वाली किल्लत को देखते हुए किशन इंदिरा फाउंडेशन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर राहत सामग्रियां पहुँचाई जा रही हैं:
- शुद्ध पेयजल और सूखा भोजन: भुखमरी और जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए।
- जरूरी दवाइयां और चिकित्सा सामग्री: बाढ़ के बाद फैलने वाले संक्रमण को रोकने के लिए।
- कपड़े और कम्बल: बेघर हुए परिवारों को सुरक्षा और राहत देने के लिए।
एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत
विपदा के इस समय में किशन इंदिरा फाउंडेशन जैसी संस्थाओं का आगे आना यह साबित करता है कि जब समाज, सरकार और स्थानीय लोग एक हो जाएं, तो बड़ी से बड़ी आपदा का सामना किया जा सकता है।
अगर आप भी इंसानियत की इस मुहिम से जुड़ना चाहते हैं, तो नगाँव स्थित इस संस्था से संपर्क कर राशन, वस्त्र या अन्य जरूरी सामग्री के रूप में अपना योगदान दे सकते हैं।



