तपस्या आत्मशुद्धि और कर्मों के क्षय का श्रेष्ठ साधन : मुनि आनंद कुमार ‘कालू’

डिंपल शर्मा,
नगांव 13 जून 2026/असम.समाचार
तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य युगप्रधान आचार्य महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार ‘कालू’ एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार के पावन सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में तपस्विनी बहन श्रीमती अंजना पुगलिया के छह की तपस्या पूर्ण होने पर भव्य तप अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, नगांव के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि श्री के मंगल महामंत्रोच्चार से हुआ। इस अवसर पर तपस्विनी बहन की सास श्रीमती कंचन देवी पुगलिया तथा ननद श्रीमती हीरा देवी बैद (किशनगंज) ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में सास-बहू के तप और आध्यात्मिक प्रेरणा से जुड़े अनुभव साझा किए, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
समारोह में तेरापंथी सभा के अध्यक्ष विनोद बोथरा, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती संगीता चोरड़िया, तेरापंथ युवक परिषद मंत्री अमित दुगड़, सभा उपाध्यक्ष रमेश सुराना, तेरापंथी महासभा के प्रभारी बजरंग सुराना (गुवाहाटी) तथा तेजपुर से पधारी ज्ञानशाला प्रभारी श्रीमती सुशीला दुगड़ सहित अनेक वक्ताओं ने तप की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए तपस्विनी बहन के प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
पुगलिया परिवार की महिलाओं ने सुमधुर गीतिकाओं की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। तेरापंथ युवक परिषद एवं महिला मंडल की बहनों ने भी गीतिकाओं के माध्यम से तपस्विनी का अभिनंदन किया।
मुनि विकास कुमार ने प्रेरणादायी गीतिका प्रस्तुत कर तपस्या के आध्यात्मिक महत्व का सुंदर प्रतिपादन किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आनंद कुमार ‘कालू’ ने कहा कि तपस्या आत्मशुद्धि और कर्मों के क्षय का श्रेष्ठ साधन है। तप के माध्यम से साधक कर्मबंधन से मुक्त होने की दिशा में अग्रसर होता है।
उन्होंने कहा कि तप केवल भूखा रहने का नाम नहीं है, बल्कि मन, वचन और काया पर नियंत्रण स्थापित कर आत्मसंयम एवं इंद्रियजय प्राप्त करना ही वास्तविक तपस्या है। मन को स्थिर रखना अत्यंत कठिन कार्य है, किंतु दृढ़ संकल्प और साधना से इसे संभव बनाया जा सकता है।
मुनि श्री ने बताया कि सेवाभावी श्रावक विनोद पुगलिया एवं श्रीमती कंचन देवी पुगलिया की पुत्रवधू तथा मोहित पुगलिया की धर्मपत्नी श्रीमती अंजना पुगलिया ने छह की तपस्या सफलतापूर्वक संपन्न की है।
उन्होंने कहा कि धर्मचक्र तप करने वाली तेजपुर की तपस्विनी श्रीमती सरोज दुगड़ से प्रेरणा लेकर अंजना पुगलिया ने यह संकल्प लिया था, जो आज पूर्ण हुआ है। उन्होंने तपस्विनी के दृढ़ मनोबल की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल तेजपुर तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा की ओर से साहित्य एवं गमूचा भेंट कर तपस्विनी बहन अंजना पुगलिया का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ सभा के मंत्री विवेक बोरड़ ने किया तथा आभार ज्ञापन तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष पीयूष पुगलिया ने व्यक्त किया। समारोह में नगांव, तेजपुर, धींग बाजार, दुमदुमा, मोरियाबाड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।



