जब क्लासरूम बन गया प्रताड़ना गृह: ‘आरिफुल’ की क्रूरता ने खड़े किए सवाल,अब किस भरोसे स्कूल भेजें नौनिहाल?

केशव पारीक,
चराईदेव, 16 मई 2026/असम.समाचार
असम के चराईदेव जिले से सामने आई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने शिक्षा के मंदिर को कलंकित कर दिया है, जहां एक शिक्षक की क्रूरता ने मानवता को शर्मसार कर दिया। पीएम श्री मथुरापुर बागीचा प्राइमरी स्कूल में मासूम छात्र-छात्राओं के साथ अमानवीय मारपीट और एक बच्चे को पहली मंजिल की खिड़की से बाहर फेंकने की कोशिश के इस भयानक मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है।
घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हर तरफ आक्रोश व्याप्त है, जिसमें बच्चों की चीखें और उनके चेहरों पर खौफ साफ देखा जा सकता है।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे 51 वर्षीय सहायक शिक्षक मोहम्मद आरिफुल इस्लाम क्लासरूम के भीतर मासूम बच्चों को डंडे, लात और घूंसों से बेरहमी से पीट रहा है।
हद तो तब हो गई जब उसने एक छात्र को उठाकर खिड़की से नीचे फेंकने का प्रयास किया। इस हैवानियत की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों के सब्र का बांध टूट गया। अभिभावकों, स्कूल के मुख्य अध्यापक नासिउर रहमान और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भोला माल की सक्रियता के बाद मामला पुलिस और जिला प्रशासन तक पहुंचा।
कानून ने भी इस मामले में तत्परता दिखाई और मथुरापुर पुलिस ने बुधवार देर रात कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक आरिफुल इस्लाम को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 117(2), 125, 351 के साथ-साथ पोक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 8 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला (केस नंबर 16/2026) दर्ज किया है।
वहीं दूसरी ओर, शिक्षा विभाग ने त्वरित कड़ा कदम उठाते हुए राज्य प्राथमिक शिक्षा निदेशक सुरंजना सेनापति के आदेश पर आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर को मामले की गहन जांच सौंप दी गई है।
इस घटना के बाद असम टी ट्राइब्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ATTSA) और स्थानीय संगठनों ने स्कूल के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों और डरे हुए अभिभावकों की मांग है कि आरोपी को नौकरी से स्थायी रूप से बर्खास्त कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
डरे हुए अभिभावकों का कहना है कि जिस जगह वे अपने बच्चों को सबसे सुरक्षित मानकर भेजते हैं, अगर वहीं रक्षक ही भक्षक बन जाए तो वे किस पर भरोसा करें। लोगों ने अब स्कूलों में सुरक्षा पुख्ता करने, सीसीटीवी की सख्त निगरानी और शिक्षकों की मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने की भी मांग उठाई है।
फिलहाल यह पूरा मामला मुख्यमंत्री कार्यालय और जिला प्रशासन की सीधी निगरानी में है, और डरे-सहमे मासूम बच्चों को इस सदमे से बाहर निकालने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श देने की व्यवस्था की जा रही है।



