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बालिका सुरक्षा पर राज्य स्तरीय परामर्श: कानून नहीं, सामूहिक प्रयास ही असली समाधान

विकास शर्मा

गुवाहाटी, 30 अगस्त 2025/असम.समाचार

असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज, खानापारा में आज “बालिका सुरक्षा: एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण की ओर” विषय पर राज्य स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन गुवाहाटी उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति ने राज्य बाल संरक्षण सोसायटी, असम एवं यूनिसेफ के सहयोग से किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष ने किया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथियों में मुकेश चंद्र साहू, आईएएस, प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल विकास विभाग), पार्थ पी. मजूमदार, आईएएस, सचिव (महिला एवं बाल विकास विभाग), डॉ. मधुलिका जोनाथन, यूनिसेफ (असम एवं उत्तर-पूर्व) की प्रमुख, हरमीत सिंह, आईपीएस, पुलिस महानिदेशक, असम सरकार, सहित माननीय न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी, न्यायमूर्ति कौशिक गोस्वामी एवं पूर्व न्यायमूर्ति रूमी कुमारी फुकन भी उपस्थित रहीं। अरुणाचल प्रदेश एवं नगालैंड के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की।

सम्मेलन में किशोर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। निहारिका लोहार, लोटासा सोना और मृणाल नायक (डिब्रूगढ़ चाय बागानों से) ने अपने संघर्ष और संकल्प की कहानियां रखीं। इन अनुभवों ने किशोरियों के लिए अधिक सहयोग तंत्र और अवसरों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया।

दिनभर चली चर्चाओं में बाल विवाह, हिंसा, और पुनर्वास की वास्तविकताओं को सामने लाया गया। असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड की टीमों ने बाल संरक्षण में हुई प्रगति और चुनौतियां प्रस्तुत कीं। पैनल चर्चाओं में विभागीय समन्वय, न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन की भूमिका तथा अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की चुनौतियों पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने डेटा सिस्टम को मजबूत करने, पीड़ित सहायता सेवाएं, हेल्पलाइन, पुनर्वास देखभाल और ऑनलाइन सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।

यह परामर्श अक्टूबर में होने वाले 11वें वार्षिक राष्ट्रीय बाल संरक्षण बहु-हितधारक सम्मेलन की तैयारियों का हिस्सा भी है। वर्ष 2025 का विषय “बालिका सुरक्षा” है, जो बाल विवाह, हिंसा, तस्करी और ऑनलाइन शोषण जैसी गंभीर समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग करता है।

समापन सत्र में डॉ. रवि कोटा, आईएएस, मुख्य सचिव, असम सरकार ने कहा कि बालिका सुरक्षा केवल कानून और नीतियों से संभव नहीं, बल्कि न्यायपालिका, सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज और समुदायों के सामूहिक प्रयास से ही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने सभी हितधारकों से चर्चा को ठोस कार्ययोजना में बदलने का आह्वान किया।

सम्मेलन का समापन इस सशक्त संदेश के साथ हुआ कि बालिका सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि साझा नैतिक जिम्मेदारी भी है, जिसे संस्थाओं और व्यक्तियों के संयुक्त प्रयासों से ही सार्थक बनाया जा सकता है

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