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‘मेघधारा में मारवाड़’ की भावपूर्ण छटा के बीच पंचम प्रांतीय कार्यकारिणी सभा सम्पन्न

पूर्वोत्तर के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, संगठनात्मक चर्चा के साथ प्रशिक्षण व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन

सुशील दाधीच,

शिलांग, 9 सितंबर 2026/असम.समाचार

पूर्वोत्तर प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की पंचम प्रांतीय कार्यकारिणी सभा-2026 का दो दिवसीय आयोजन 5 एवं 6 सितंबर को शिलांग में उत्साह, आत्मीयता और गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। ‘मेघधारा में मारवाड़’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक प्रतिनिधियों एवं अतिथियों ने हिस्सा लिया।

आयोजन में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति एवं परंपराओं को मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता से जोड़ने का प्रयास किया गया। सम्मेलन के दौरान संगठनात्मक एकता, सामाजिक सहभागिता और विभिन्न क्षेत्रों के सदस्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम के पहले दिन 5 सितंबर को सामूहिक भोजन के बाद सारथी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का संचालन मोरानहाट के विमल अग्रवाल ने किया। प्रशिक्षण में संगठनात्मक कार्यप्रणाली, नेतृत्व विकास, कार्यकर्ताओं की भूमिका तथा समाजसेवा को प्रभावी बनाने से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया।

शाम को मावर हॉल में भव्य सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। शिलांग की बालिकाओं एवं महिलाओं ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन पाठशाला, असम की प्रतिभा शर्मा ने किया। वहीं निर्मला कमल अलमपुरिया ने राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुति से सांस्कृतिक संध्या में राजस्थानी रंग भर दिया।

दूसरे दिन 6 सितंबर को पंचम प्रांतीय कार्यकारिणी सभा आयोजित हुई। सभा की अध्यक्षता महेश चाचन ने तथा सह-अध्यक्षता अजय अग्रवाल ने की। सभा में संगठन की गतिविधियों, सामाजिक दायित्वों और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

सभा का प्रमुख आकर्षण पूर्वोत्तर प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष कैलाश काबरा का प्रेरणादायक संबोधन रहा। उन्होंने संगठन की एकता, सामूहिक उत्तरदायित्व और समाज की प्रगति के लिए मिलकर कार्य करने पर जोर दिया। उनके संबोधन से प्रतिनिधियों में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार हुआ।

मारवाड़ी सम्मेलन, शिलांग शाखा के अध्यक्ष अनिल बजाज ने स्वागत संबोधन में प्रांतीय अध्यक्ष, पदाधिकारियों, अतिथियों और प्रतिनिधियों का शिलांग की धरती पर स्वागत किया। उन्होंने आयोजन की मेजबानी का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम संगठन को मजबूत करने के साथ विभिन्न क्षेत्रों के सदस्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं।

इस अवसर पर मारवाड़ी सम्मेलन महिला समिति की पूर्व अध्यक्ष डॉली अग्रवाल का प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में स्वागत किया गया। कैलाश काबरा ने उनका स्वागत करते हुए संगठन एवं समाज के प्रति उनके अनुभव और योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

मुख्य सत्र के समापन पर मारवाड़ी सम्मेलन, शिलांग शाखा के सचिव कमल अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्यों की तकनीकी समिति की बैठक हुई, जिसमें विभिन्न संगठनात्मक एवं कार्यात्मक विषयों तथा आगामी गतिविधियों पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन का आयोजन मारवाड़ी सम्मेलन, शिलांग शाखा, मारवाड़ी महिला समिति, शिलांग शाखा तथा मारवाड़ी युवा मंच, शिलांग शाखा के संयुक्त प्रयासों से किया गया। मुख्य संयोजक महेश चाचन एवं सह-संयोजक अजय अग्रवाल ने आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयोजन को सफल बनाने में अमन पासारी, सूरज जसरासरिया, सुनील सिंघानिया, विकास चोखानी, पीयूष अजमेरा, संजय जसरासरिया, नीलम बजाज, राधा पासारी, स्वाति अजमेरा, शारदा चोखानी, श्रीचा अग्रवाल, मनीषा झुनझुनवाला, सरिता अग्रवाल, पूजा भूत, स्निग्धा सिंघानिया तथा जूली जैन सहित अनेक सदस्यों का योगदान रहा।

बाहर से आने वाली महिला प्रतिनिधियों के लिए शिलांग शाखा की ओर से निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई। इसके अलावा अतिथियों एवं प्रतिनिधियों के लिए आवास, भोजन और आतिथ्य की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई। आयोजन में मिले आत्मीय स्वागत एवं सत्कार की प्रतिनिधियों ने सराहना की।

विदाई के अवसर पर बाहर से आए अतिथियों एवं प्रतिनिधियों को मेघालय के स्थानीय स्मृति-चिह्न एवं स्थानीय उत्पाद भेंट किए गए। इस पहल ने सम्मेलन को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के साथ ‘मेघधारा में मारवाड़’ की भावना को और अधिक सार्थक बनाया।

दो दिवसीय सम्मेलन संगठनात्मक विचार-विमर्श, प्रशिक्षण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आत्मीय आतिथ्य और सामाजिक एकता का सुंदर संगम रहा। शिलांग की धरती पर आयोजित यह सम्मेलन मारवाड़ी समाज की संस्कृति, एकता, आत्मीयता और सामूहिक शक्ति का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया।

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