“गुवाहाटी में अफसर के घर खुला ‘नोटों का लॉकर’, 48 लाख कैश देख विजिलेंस भी रह गई दंग”
कहा जा रहा है कि जिस अफसर के दफ्तर में फाइलें “चाय-पानी” के बिना आगे नहीं बढ़ती थीं, उसके घर से अब नोटों की “बरसात” निकल रही है। विजिलेंस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की जमीन और कागजों की कीमत आखिर कितनी भारी पड़ रही है।

विकास शर्मा,
गुवाहाटी, 22 मई 2026/असम.समाचार
असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच गुरुवार को एक बड़ा खुलासा सामने आया। भूमि अभिलेख निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक और एसीएस अधिकारी लचित कुमार दास को विजिलेंस एवं एंटी करप्शन की टीम ने कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद जब टीम उनके घर पहुंची तो रातभर चली तलाशी में नोटों का ऐसा जखीरा मिला कि अधिकारी भी दंग रह गए।
सूत्रों के अनुसार, भूमि बिक्री अनुमति के लिए एनओसी जारी करने के एवज में एक लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत विजिलेंस एवं एंटी करप्शन निदेशालय को मिली थी। शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, जिसके बाद उसने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से संपर्क किया।
इसके बाद 21 मई को रुपनगर स्थित भूमि अभिलेख निदेशालय में जाल बिछाया गया। जैसे ही अतिरिक्त निदेशक लचित कुमार दास ने शिकायतकर्ता से 45 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर स्वीकार किए, टीम ने उन्हें कार्यालय कक्ष से ही दबोच लिया। रिश्वत की रकम मौके से बरामद कर जब्त कर ली गई।
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम देर रात तक बेलतला तिनियाली स्थित रानी बागान इलाके में अधिकारी के आवास पर छापेमारी करती रही। बताया जा रहा है कि घर के भीतर एक लॉकर से 48 लाख 38 हजार 150 रुपये नकद बरामद हुए। नोटों की गिनती देर रात तक चलती रही और आसपास के इलाके में भी इस कार्रवाई की चर्चा होती रही।
इतना ही नहीं, जांच टीम को करीब 80 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट प्रमाणपत्र भी मिले, जो अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई जीवन बीमा पॉलिसियां, डाक जीवन बीमा दस्तावेज, बैंक खातों से जुड़े कागजात और जमीन-जायदाद के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। अब जांच एजेंसियां इन संपत्तियों के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में जुट गई हैं।
इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक थाना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
कहा जा रहा है कि जिस अफसर के दफ्तर में फाइलें “चाय-पानी” के बिना आगे नहीं बढ़ती थीं, उसके घर से अब नोटों की “बरसात” निकल रही है। विजिलेंस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की जमीन और कागजों की कीमत आखिर कितनी भारी पड़ रही है।



