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20 किलो मोतियों से गढ़ी माँ दुर्गा की अनोखी प्रतिमा, दृष्टिबाधित भी कर सकेंगे ‘छूकर दर्शन’

इस विशेष प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दृष्टिबाधित लोगों के लिए भी सुलभ बनाया गया है। बसाक कहते हैं, “हमारे अंधे भाई-बहन इसे देखकर नहीं, बल्कि छूकर अनुभव कर सकते हैं कि माँ दुर्गा की प्रतिमा कैसी होती है। मोती के डॉट्स के जरिये वे इसकी आकृति को महसूस कर सकते हैं।”

राजा शर्मा

धुबरी 26 सितंबर 2025/असम.समाचार

दुर्गा पूजा का त्योहार हर साल भक्ति, आस्था और कला की नई मिसाल पेश करता है, लेकिन इस बार धुबरी के फ्लोटिंग क्लब में एक ऐसी प्रतिमा लोगों का ध्यान खींच रही है, जो पारंपरिक मिट्टी या रंगों से नहीं, बल्कि करीब 20 किलो रंगीन प्लास्टिक मोतियों से बनी है।

इस अनोखी रचना के पीछे हैं आर्टिस्ट संजीब बसाक, जिन्होंने महीनों की मेहनत से माँ दुर्गा की जीवंत प्रतिमा को मोतियों से गढ़ा है। बसाक बताते हैं, “मैं आपातकालीन सेवा में कार्यरत हूं, इसलिए दिन में समय नहीं मिलता। रात को परिवार के सहयोग से मैं इस प्रतिमा पर काम करता हूं। करीब 3 महीने की मेहनत के बाद यह स्वरूप साकार हुआ।”

इस विशेष प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दृष्टिबाधित लोगों के लिए भी सुलभ बनाया गया है। बसाक कहते हैं, “हमारे अंधे भाई-बहन इसे देखकर नहीं, बल्कि छूकर अनुभव कर सकते हैं कि माँ दुर्गा की प्रतिमा कैसी होती है। मोती के डॉट्स के जरिये वे इसकी आकृति को महसूस कर सकते हैं।”

संजीब बसाक को उनके रचनात्मक कार्यों के लिए कई संस्थानों से सम्मान मिल चुका है, लेकिन वे कहते हैं, “लोगों के चेहरे पर खुशी देखकर ही मुझे असली पुरस्कार मिलता है। मैं आगे भी इसी तरह की प्रतिमाएं बनाता रहूंगा।”

इस साल धुबरी का फ्लोटिंग क्लब नवरात्रि में कला और समावेशिता की इस नई मिसाल का साक्षी बनने जा रहा है।

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