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मोदी का मास्टरस्ट्रोक, एनडीए ने खेला साउथ कार्ड, सी.पी. राधाकृष्णन बने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार

राष्ट्रीय डेस्क

नई दिल्ली, 17 अगस्त 2025/असम.समाचार

एनडीए ने रविवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने उनके नाम की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी को विश्वास है राधाकृष्णन का अनुभव और संगठनात्मक पृष्ठभूमि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में नई ऊर्जा भरेगी।

राधाकृष्णन दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं, भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष रहे और झारखंड व पांडिचेरी के राज्यपाल भी रहे हैं। वे महज 16 वर्ष की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हुए हैं और 1974 में जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति में शामिल हुए थे।

तमिलनाडु पर सीधा फोकस

बीजेपी का यह कदम सीधे तौर पर तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ा माना जा रहा है। राज्य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में पार्टी ने स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर संदेश देने का प्रयास किया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राधाकृष्णन का विरोध करना क्षेत्रीय दलों विशेषकर डीएमके और कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।

विपक्ष पर दबाव

‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए बिहार या आंध्र प्रदेश से उम्मीदवार उतारने की अटकलें लगाई जा रही थीं। एनडीए के इस कदम ने विपक्ष को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है।

मोदी-युग से परिचित

राधाकृष्णन न केवल अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी रहे हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली से भी भलीभांति परिचित हैं। उन्होंने 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संबोधित किया था और ताइवान जाने वाले पहले भारतीय संसदीय दल का भी हिस्सा रहे थे।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि एनडीए ने यह चयन कर एक ही तीर से कई निशाने साधे हैं—दक्षिण भारत में पकड़, आरएसएस का विश्वास, विपक्षी गठबंधन पर दबाव और संगठनात्मक मजबूती।

 

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