राजस्थान फाउंडेशन( असम एवं नॉर्थ ईस्ट चैप्टर) का अभिनव प्रयास,असम के वीर लचित बरफुकन की गाथा अब राजस्थान के पाठ्यक्रम में शामिल कराने की पहल
इस पहल के साथ ही राजस्थान फाउंडेशन ने एक और संकल्प और मिशन की शुरुआत की है एक ऐसी कोशिश, जो राष्ट्रीय एकता और इतिहास की प्रामाणिक विरासत को जोड़ने का कार्य कर रही है,

विकास शर्मा
गुवाहाटी/जयपुर/4 अगस्त 2025
“मेरा काम चेताना है… बाकी भगवान के हाथ में है। लेकिन विश्वास अटल है ,जिस कार्य में लगा हूँ, वो होकर रहेगा।”
इसी विश्वास और संकल्प के साथ राजस्थान फाउंडेशन (असम एवं नॉर्थईस्ट चैप्टर) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन के अध्यक्ष रतन शर्मा ने राजस्थान सरकार से औपचारिक अनुरोध किया है कि असम के महान सेनापति लचित बरफुकन की गौरवगाथा को राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाए।
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यह सिर्फ एक ऐतिहासिक तथ्य को जोड़ने की बात नहीं है, बल्कि दो राज्यों असम और राजस्थान के बीच सांस्कृतिक संवाद, भावनात्मक एकता और राष्ट्रीय समरसता को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
रतन शर्मा ने बताया कि “अहोम साम्राज्य और लचित बरफुकन की वीरगाथा भारत की अमूल्य धरोहर है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा नैतिक उत्तरदायित्व है। उनकी रणनीति, राष्ट्रभक्ति और साहस आज भी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जैसे संस्थानों में प्रेरणा का स्रोत हैं।”
राजस्थान फाउंडेशन असम एवं नॉर्थ ईस्ट चैप्टर की तरफ से समाज सेवी और उद्यमी और फाउंडेशन के अध्यक्ष रतन शर्मा ने इस बाबत राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को एक विस्तृत पत्र सौंपा है, जिसमें इस ऐतिहासिक प्रसंग को स्कूली किताबों में समाविष्ट करने का आग्रह किया गया है।
अध्यक्ष शर्मा ने कहा, “हम मानते हैं प्रयास हमारा है, परिणाम ऊपरवाले का। पर यदि संकल्प सच्चा हो, तो राहें खुद बन जाती हैं।”
इस पहल के साथ ही राजस्थान फाउंडेशन ने एक और संकल्प और मिशन की शुरुआत की है एक ऐसी कोशिश, जो राष्ट्रीय एकता और इतिहास की प्रामाणिक विरासत को जोड़ने का कार्य कर रही है।
बता दें कि लाचित बोरफुकन अहोम साम्राज्य (1228-1826) के एक प्रसिद्ध सेना कमांडर थे। उन्हें 1671 की ‘सरायघाट की लड़ाई’ में उनके नेतृत्व के लिए जाना जाता है, जिसने मुगल सेना द्वारा असम को वापस लेने के प्रयास को विफल कर दिया था।