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डिब्रूगढ़ में सीएम हिमंत का तीखा हमला,गौरव गोगोई की पाकिस्तान यात्रा पर गंभीर सवाल, बिना वीजा रावलपिंडी-तक्षशिला कैसे पहुंचे ?

डिब्रूगढ़ की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद असम की राजनीति में सियासी घमासान और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

केशव पारीक,संवाददाता

डिब्रूगढ़ 9 फरवरी 2026/असम.समाचार

असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने डिब्रूगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने गोगोई की वर्ष 2013 की पाकिस्तान यात्रा को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना वैध वीजा क्लियरेंस के तक्षशिला और रावलपिंडी जैसे संवेदनशील इलाकों में जाना कैसे संभव हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौरव गोगोई ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया है कि वे लाहौर गए थे और तक्षशिला देखने के लिए अनुमति मांगी थी। इस पर सवाल उठाते हुए सीएम ने कहा कि तक्षशिला न तो इस्लामाबाद में है और न ही कराची में, बल्कि यह रावलपिंडी जिले में स्थित है, जहां पाकिस्तान आर्मी का मुख्यालय (GHQ) भी है।

डॉ. शर्मा ने दावा किया कि उनके पास गौरव गोगोई के वीजा की कॉपी मौजूद है, जिसमें केवल लाहौर, कराची और इस्लामाबाद का उल्लेख है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना रावलपिंडी के वीजा के वे वहां कैसे पहुंचे और तक्षशिला कौन लेकर गया।

मुख्यमंत्री ने कहा,

“आज के बाद हमारा संदेह और गहरा हो गया है। पाकिस्तान में एक भारतीय नागरिक को बिना वीजा के रावलपिंडी जैसे संवेदनशील इलाके में घूमने की अनुमति कैसे मिली? असम के लोगों को क्या मूर्ख समझा जा रहा है?”

उन्होंने यह भी कहा कि “मैं पार्क देखने गया था, बाजार देखने गया था” जैसे तर्क बच्चों को भी नहीं समझाए जा सकते। अगर मोबाइल में फोटो हैं तो यह बताया जाए कि वे किन-किन स्थानों पर गए थे।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि गौरव गोगोई की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मामले और अधिक जटिल हो गए हैं और अब उन्हें कई सवालों के जवाब देने होंगे।

मौलवी के साथ फोटो विवाद पर प्रतिक्रिया

गौरव गोगोई द्वारा मुख्यमंत्री की एक मौलवी के साथ तस्वीर दिखाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि तरुण गोगोई और गौरव गोगोई स्वयं भी कई मौलानाओं से मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ दिखाई गई तस्वीरें पुरानी हैं और कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने स्वयं कई मौलवियों और धार्मिक स्थलों का दौरा किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा,

“मौलवी या मौलाना से मिलना कोई अपराध नहीं है। जैसे पुरोहित से मिलना सामान्य है, वैसे ही मौलवी से मिलना भी कोई नई या छिपाने वाली बात नहीं है।”
बच्चों की धर्म और नागरिकता को लेकर भी सवाल
मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई के बच्चों की धर्म और नागरिकता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चों की स्वाभाविक धर्म और राष्ट्रीयता माता-पिता बदल सकते हैं या नहीं, इस पर कानूनी जांच होनी चाहिए।

डॉ. शर्मा ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर उनके खिलाफ केस किया जाता है तो उन्हें खुशी होगी, क्योंकि तब यह मामला अदालत के समक्ष स्पष्ट रूप से आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा,

“मैं जो कहता हूं, वह करता हूं। अगर मुझ पर केस किया गया तो मैं अदालत में यह सवाल उठाऊंगा कि नाबालिग की धर्म और नागरिकता बदलने का अधिकार माता-पिता को है या नहीं।”

डिब्रूगढ़ की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद असम की राजनीति में सियासी घमासान और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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