बाबा श्याम के दरबार में अनोखी भक्ति ,कीलों पर लेटकर 17 किमी की यात्रा

खाटूधाम (राजस्थान) 8 अगस्त 2025/असम.समाचार
बाबा श्याम के दरबार में भक्ति के रूप अनेक हैं कोई ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ नाचते-गाते आता है, कोई पैदल केसरिया ध्वज थामकर। लेकिन उत्तर प्रदेश के दतिया के अजय कुशवाहा ने अपनी भक्ति को एक विलक्षण रूप दिया। उन्होंने रींगस से खाटू तक की 17 किलोमीटर यात्रा नुकीली कीलों पर लेट-लेटकर मात्र 7 घंटे में पूरी की।
अजय ने बताया, “मेरी कोई व्यक्तिगत मन्नत या इच्छा नहीं है। मैं बाबा से देश में अमन-चैन और खुशहाली की प्रार्थना करने आया हूं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि यह विचार उन्हें एक वीडियो देखकर आया, जिसमें एक भक्त इसी प्रकार कीलों पर यात्रा कर रहा था।
भाईचारे और सद्भाव का संदेश
अजय की यह कठिन यात्रा समाज में बढ़ते बैर-भाव, शक-संदेह और नशे की लत से युवाओं को बचाने के संदेश के साथ थी। उन्होंने कहा, “देश के लोग एक-दूसरे के साथ भाईचारे से रहें, यही मेरी प्रार्थना है।”
कनक दंडवत की भक्ति
इसी दौरान एक अन्य भक्त ने कनक दंडवत कर बाबा के दरबार की यात्रा की। जिसे साष्टांग दंडवत भी कहा जाता है, इसमें भक्त अपने पूरे शरीर के आठ अंग दोनों हाथ, दोनों घुटने, दोनों पैर, छाती और सिर भूमि से स्पर्श कर भगवान को प्रणाम करता है।
यह क्रिया अहंकार का त्याग, पूर्ण समर्पण और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती है।
कनक दंडवत करने की विधि:
1. भूमि पर पेट के बल सीधे लेटें।
2. हाथ जोड़कर सिर के ऊपर रखें।
3. आठों अंगों को भूमि से स्पर्श कर प्रणाम करें।
4. कुछ क्षण इसी मुद्रा में रहें, फिर उठकर पुनः आगे बढ़ें।
बाबा श्याम के दरबार में हर भक्त की भक्ति का अपना रंग है,
कभी कीलों का तप, कभी दंडवत का समर्पण।मगर हर रूप में भाव एक ही श्याम मेरे श्याम।