भूटान पहाड़ियों से उतरे जंगली हाथी: असम के तामुलपुर में दहशत, मानव–हाथी संघर्ष चरम पर

कनक चंद्र बोड़ो
तामुलपुर, 8 दिसंबर/असम.समाचार
इंडो–भूटान सीमा से सटे असम के तामुलपुर जिले में जंगली हाथियों के लगातार हमलों से दहशत का माहौल बना हुआ है। भूटान की पहाड़ी जंगलों से एक विशाल झुंड के उतरने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। वर्ष 2025 में अब तक 11 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल हुए हैं। दर्जनों घर और सैकड़ों बीघा फसलें हाथियों द्वारा रौंद दी गई हैं।
रविवार देर रात, 7 दिसंबर को जंगली हाथियों का बड़ा झुंड तमुलपुर के कई गांवों में घुस आया और व्यापक नुकसान पहुंचाया। सबसे अधिक क्षति पालासगुड़ी के चेचापानी कुमारपाड़ा में हुई, जहां हाथियों ने कई घरों और धान के खेतों को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
थेम्ब्रा नारजारी, पासुराम बसुमातारी और अजीत नारजारी के घर और खेत सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
एक स्थानीय महिला ने भयभीत स्वर में बताया
“60 से अधिक हाथी हमारे गांव में घुस आए और सब कुछ नष्ट कर दिया। हम आराम कर रहे थे तभी अचानक हमला हुआ। किसी तरह जान बचाकर भागे। अब आजीविका फिर से खड़ी करने के लिए सरकारी मदद की जरूरत है।”
इसी बीच, 8 दिसंबर को अंगरकाटा बलाहाटी गांव में एक अन्य घटना में छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जब एक झुंड ने चाय बागान में काम कर रहे श्रमिकों पर हमला कर दिया।
घायलों में चंदा मुर्मू, चितल मार्डी, इमसान किस्कू, जारमेन मार्डी, भोजो मार्डी और बदुराई टुडू शामिल हैं। सभी को तत्काल स्थानीय चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया।
इंडो–भूटान सीमा क्षेत्र में बढ़ते हमलों से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों ने आवासीय इलाकों को सुरक्षा प्रदान करने तथा भारी क्षति का उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने वन विभाग, स्थानीय विधायक और बीटीसी प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर दीर्घकालिक समाधान लागू करने की अपील की।
ग्रामीणों का आरोप है कि असम वन विभाग प्रभावी कदम उठाने में विफल रहा है, जिसके कारण हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है।
क्षेत्र में अभी भी हाथियों की आवाजाही जारी है और लोग सतर्कता के साथ रातें गुजारने को मजबूर हैं।



