विजय दिवस 2025 : मोहनबाड़ी एयरबेस पर वायुसेना का रोमांचकारी एयरियल डिस्प्ले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने की शिरकत

दिनेश दास
डिब्रूगढ़, 10 दिसंबर 2025/असम.समाचार
भारतीय वायुसेना ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध विजय को याद करते हुए बुधवार को एयर फ़ोर्स स्टेशन मोहनबाड़ी, डिब्रूगढ़ में भव्य विजय दिवस एयरियल डिस्प्ले का शानदार आयोजन किया। मुख्य अतिथि के रूप में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

पूर्वी वायु कमान मुख्यालय द्वारा आयोजित दिनभर चले इस कार्यक्रम ने सैन्य एवं नागरिक हस्तियों, पूर्व वायु योद्धाओं और बड़ी संख्या में उपस्थित स्कूली बच्चों को रोमांचित कर दिया। आकर्षक वायु प्रदर्शन में वायुसेना के दमदार बेड़े सुखोई-30 लड़ाकू विमान, डोर्नियर-228 सर्विलांस एयरक्राफ्ट, एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर और मी-17 हेलीकॉप्टर ने अपनी अद्भुत क्षमताएं प्रदर्शित कीं।
सुबह 9 बजे से दोपहर 2.30 बजे तक चले इस एयर शो ने भारतीय वायुसेना की परिचालन दक्षता का शानदार प्रमाण प्रस्तुत किया। एक छात्र ने कहा“इन विमानों की सटीकता और वायु योद्धाओं की पेशेवर क्षमता को अपनी आंखों से देखना बेहद प्रेरणादायक है।”
कार्यक्रम में 1971 युद्ध पर आधारित विशेष प्रदर्शनी और एक फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। पूर्वी वायु कमान के लिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मोहानबाड़ी जैसे एयरबेस से ही 1971 में निर्णायक वायु अभियानों को अंजाम दिया गया था।
पत्रकारों से बातचीत में एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने 1971 युद्ध के गौरवशाली पलों को याद करते हुए कहा,
“भारतीय वायुसेना ने उस समय जो दक्षता दिखाई, चाहे वह नवंबर के दिन के अभियान हों, तेज और निर्णायक एयर एक्शन हो या फिर बांग्लादेश के गवर्नर हाउस पर हमला इन सभी ने युद्ध को समाप्ति की ओर निर्णायक रूप से मोड़ दिया।”

उन्होंने तीनों सेनाओं के समन्वय को युद्ध विजय का मूल मंत्र बताते हुए कहा,
“यह सिर्फ वायुसेना की सफलता नहीं बल्कि संयुक्त संचालन (ज्वाइंटमैनशिप) की ऐतिहासिक उपलब्धि थी। नदी पार करने के अभियान हों या एयर ड्रॉप यह सब सेना और वायुसेना के निकट समन्वय के बिना संभव नहीं था। पश्चिमी सेक्टर में नौसेना के योगदान ने भी हमें बड़ा सबक दिया कि संयुक्त अभियान युद्ध को निर्णायक रूप से जीत सकते हैं। भारतीय वायुसेना आज भी उन्हीं शिक्षाओं के आधार पर प्रशिक्षण और साजोसामान को आगे बढ़ा रही है।”
कार्यक्रम उत्साह, गौरव और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत रहा, जिसने 1971 के अदम्य साहस और बलिदान को एक बार फिर जीवंत कर दिया।



