लाचित बोरफुकन की राह पर चलकर ही जीती जा सकती है आज की लड़ाई : तोगड़िया
डॉ. तोगड़िया ने आरोप लगाया कि असम में 50 लाख से अधिक घुसपैठिए मौजूद हैं और उन्हें बाहर करने के लिए हर गांव में “लाचित” तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक समाज संगठित होकर आगे नहीं आएगा, तब तक इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है।

डिंपल शर्मा,संवाददाता, नगांव
नगांव 2 फ़रवरी 2026/असम.समाचार
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि केवल दस्तावेज़ों के आधार पर किसी को बांग्लादेशी तय नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने 1951 में मतदान करने वाले मुस्लिम मतदाताओं की जिला-स्तरीय सूची जारी करने, फॉर्म भरने की अनिवार्यता तथा 1951 के बाद वोटर सूची में शामिल हुए लोगों के डीएनए परीक्षण की मांग रखी।
डॉ. तोगड़िया ने अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, आर्थिक बहिष्कार और आवश्यक आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि देशभर में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून और प्रशासनिक सख्ती जरूरी है। उनका दावा था कि यदि अभी फोकस नहीं किया गया तो 20 वर्षों बाद हालात बांग्लादेश जैसे हो सकते हैं।
उन्होंने असम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश में भी कथित रूप से “जेहादी तत्वों” की उपस्थिति बढ़ने का उल्लेख किया और कहा कि असम में घुसपैठ की समस्या अब भी बनी हुई है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार कार्रवाई कर रही है और हिंदुत्व के मुद्दे पर वे सरकार के साथ हैं।
डॉ. तोगड़िया ने हनुमान चालीसा केंद्र खोलने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि हिंदुओं की सुरक्षा और संगठनात्मक मजबूती के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विपक्ष के बावजूद सत्तारूढ़ दल कभी रुका नहीं है और आगे भी सख्त कदम उठाने चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा कि यदि यह लड़ाई जीतनी है तो असम के महान वीर योद्धा लाचित बोरफुकन से प्रेरणा लेनी होगी, जिन्होंने मुगलों की एक लाख की सेना को असम से खदेड़ दिया था। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है उसी साहस और संकल्प की भावना को पुनर्जीवित करने की।
डॉ. तोगड़िया ने आरोप लगाया कि असम में 50 लाख से अधिक घुसपैठिए मौजूद हैं और उन्हें बाहर करने के लिए हर गांव में “लाचित” तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक समाज संगठित होकर आगे नहीं आएगा, तब तक इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि असम की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए जन-जागरूकता और संगठित प्रयास जरूरी हैं।
डॉ. तोगड़िया ने यह विचार नगांव में समाजसेवी एवं विश्व हिंदू परिषद के नेता धनपत घोड़ावत के निवास पर आयोजित एक संक्षिप्त बैठक के दौरान व्यक्त किए।



