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“रंगीलो राजस्थान (आरआर)” टीम का भव्य होली महोत्सव गुवाहाटी की सांस्कृतिक पहचान बना

निस्संदेह, यह महोत्सव केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, संगीत और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है। चंग की गूंज, बांसुरी की मधुरता और फागुन की मस्ती से सराबोर यह आयोजन नगरवासियों के लिए अविस्मरणीय स्मृति बनता जा रहा है।

ओपी शर्मा,

गुवाहाटी 27 फ़रवरी 2026/असम.समाचार

एम.एस. रोड स्थित दासुराम मिर्जामल विवाह भवन में ‘रंगीलो राजस्थान आरआर टीम’ द्वारा आयोजित भव्य होली महोत्सव इस वर्ष भी पूरे उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हो रहा है। वर्ष 2018 में जिस संकल्प और समर्पण के साथ इस आयोजन की शुरुआत हुई थी, वह आज गुवाहाटी नगर की एक सशक्त सांस्कृतिक परंपरा के रूप में स्थापित हो चुका है।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर किया गया। बसंत पंचमी से पारंपरिक फाग गीतों के साथ इसकी सांस्कृतिक शुरुआत मानी जाती है। प्रतिदिन रात्रि 9:30 बजे मंगलाचरण एवं गणपति वंदना के साथ कार्यक्रम प्रारंभ होता है, जिसके उपरांत राजस्थानी फाग, चंग धमाल, बांसुरी वादन, गैर नृत्य तथा लोकगीतों की प्रस्तुतियाँ देर रात्रि 2:00 बजे तक निरंतर चलती हैं।

इस आयोजन की विशेषता शुद्ध राजस्थानी लोकधुनें हैं। चंग की थाप पर प्रस्तुत “फाग” और “धमाल” से पूरा वातावरण फागुनी रंग में रंग जाता है। बांसुरी, ढोलक, हारमोनियम तथा अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों का मधुर संगम श्रोताओं को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ देता है। शेखावाटी अंचल की प्रसिद्ध होली धमाल कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।

संदीप जांगिड़ एवं प्रमोद शर्मा की बांसुरी की मधुर धुन तथा राहुल जोशी उर्फ ‘राफेल’ की ऊँची स्वर लहरियाँ पंडाल में उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। कलाकारों की जुगलबंदी पर पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठता है।

पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड से बड़ी संख्या में राजस्थानी समाज एवं अन्य संस्कृति प्रेमी इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं। यह आयोजन क्षेत्रीय सीमाओं से परे सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है।

हर वर्ष शेखावाटी क्षेत्र से विशेष कलाकारों का दल आमंत्रित किया जाता है, जो स्थानीय टीम के साथ मंच साझा करता है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों की सामूहिक “धमाल” प्रस्तुति से वातावरण उल्लास, रंग और ऊर्जा से भर उठता है।

कार्यक्रम स्थल पर आगंतुकों के लिए चाय, हल्के अल्पाहार एवं विशेष अवसरों पर पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई है। अनेक परिवार अपने बच्चों के साथ प्रतिदिन उपस्थित होकर उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित करा रहे हैं।

इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे एक समर्पित टीम का निरंतर परिश्रम निहित है। मुख्य रूप से धनपत कुण्डलिया, संजय काबरा, सुनील सरपंच, सन्दीप जोशी, सूरज पारीक, प्रदीप पारीक, अंकित कुण्डलिया, रमेश पारीक, वरिष्ठ रामगोपाल पारीक, आदर्श शर्मा ‘बबली’, राहुल महर्षि शर्मा, राजेंद्र उपाध्याय, सुरेंद्र शर्मा, राम पारीक, अजित शर्मा, शैलेन्द्र शर्मा, मोहित मालू, गोबिंद सराफ, अनिल पंसारी, निर्मल शर्मा ‘कालू’ तथा महेश जैन बगड़ा सहित पूरी टीम मंच व्यवस्था, ध्वनि-प्रकाश, सुरक्षा, अनुशासन एवं अतिथि सत्कार की जिम्मेदारियों का सुव्यवस्थित निर्वहन कर रही है।

सक्रिय सहयोगियों में संदीप चमड़िया, श्रीचंद ढाका, जगमोहन सोनी, कुबेर खुड़ीवाल, अमित सैनी, अनिल महर्षि, मीनू नाहरिया शर्मा, पवन जाखड़, विनोद बोरड़, मनीष सिंघी, पवन जमर, सुमित लाटा एवं सोहन सैनी उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं।

संगठन, समन्वय एवं प्रचार-प्रसार की कमान अरविंद चोटिया शर्मा द्वारा प्रभावी ढंग से संभाली जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप कार्यक्रम की लोकप्रियता प्रतिवर्ष निरंतर बढ़ती जा रही है।

इस वर्ष नई पारंपरिक धमालों का समावेश, युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने की पहल, राजस्थानी लोकशैली से सुसज्जित मंच सज्जा, आधुनिक ध्वनि एवं प्रकाश तकनीक तथा अनुशासन एवं सुरक्षा के लिए विशेष स्वयंसेवक दल विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

निस्संदेह, यह महोत्सव केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, संगीत और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है। चंग की गूंज, बांसुरी की मधुरता और फागुन की मस्ती से सराबोर यह आयोजन नगरवासियों के लिए अविस्मरणीय स्मृति बनता जा रहा है।

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