रंगघर की दीवारों ने फिर सुनीं बिहू की थापें, रंगपुर मेले में लौटी सैकड़ों साल पुरानी रौनक

केशव पारीक
शिवसागर, 15 जनवरी 2026/असम.समाचार
एशिया के प्राचीनतम जीवित रंगमंचों में शामिल ऐतिहासिक रंगघर एक बार फिर उल्लास और संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठा, जब रुपोही मैदान में 16वें वार्षिक रंगपुर मेला शीतकालीन महोत्सव का आयोजन किया गया।
ताई अहोम युवा परिषद असम एवं रंगपुर मेला आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह छह दिवसीय महोत्सव 10 जनवरी से प्रारंभ हुआ है,
जिसका मुख्य उद्देश्य रंगघर और रंगपुर नगर की प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित करना तथा सिवसागर में पर्यटन को बढ़ावा देना है।
माघ बिहू थीम पर आधारित इस महोत्सव में अहोम, बोडो सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के सांस्कृतिक नृत्य, पारंपरिक बिहू नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया।
वहीं रस्साकशी, फिसलन खंभा चढ़ाई, मटका फोड़ और काड़ी खेला जैसे पारंपरिक खेलों ने उत्सव में विशेष आकर्षण जोड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः ध्वजारोहण एवं मैदाम तर्पण अनुष्ठान के साथ की गई।
विभिन्न समुदायों के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 से लगातार आयोजित हो रहा रंगपुर मेला, असम की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर को संजोने के साथ-साथ सामाजिक एकता और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



