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डिब्रूगढ़ में चाय मजदूरों और आदिवासी समुदायों का जोरदार प्रदर्शन

दिनेश दास

डिब्रूगढ़ 13 अक्टूबर 2025/असम.समाचार

असम के चाय जनजाति और आदिवासी समुदायों के हजारों लोगों ने सोमवार को डिब्रूगढ़ में बड़ी रैली का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों ने तुरंत अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने, दैनिक मजदूरी बढ़ाने और कानूनी रूप से जमीन आवंटन की मांग की।

डिब्रूगढ़ जिले के विभिन्न हिस्सों से आए प्रदर्शनकारी चौकिडिंगी चौराहे की ओर चार प्रमुख स्थानों से मार्च करते हुए पहुंचे, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम हो गया। अधिकारियों के अनुसार, रैली के मद्देनजर कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।

रैली के कारण 218 चाय बागानों, 24,000 छोटे किसानों की प्लांटेशनों और 70 बॉट-लीफ फैक्ट्रियों में काम प्रभावित हुआ, क्योंकि हजारों मजदूर प्रदर्शन में शामिल हुए।

इस रैली का आयोजन असम चा मज़दूर संघ, असम टी ट्राइब्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन , ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम, 36 जनजाति परिषद और चाय जनोगुस्तीय जातीय महासभा ने संयुक्त रूप से किया।

आटसा के अध्यक्ष धीरज गोवाला ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य की सबसे बड़ी समुदायों में से होने के बावजूद हम सबसे वंचित बने हुए हैं। बीजेपी ने हमारे समर्थन से चुनाव जीते, लेकिन न्याय देने में विफल रही। अगर चाय बागानों में बीजेपी के कार्यालय और निजी परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित की जा सकती है, तो बेघर मजदूरों को कानूनी अधिकार क्यों नहीं मिल सकते?”

एसीएमएस डिब्रूगढ़ के सचिव नबीन चंद्र क्योट ने आरोप लगाया कि आजादी के 78 साल बाद भी चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय गरीबी में जी रहे हैं और उन्हें बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने तीन मांगों – ST दर्जा, दैनिक मजदूरी बढ़ाकर ₹551 और जमीन के अधिकार – को “अपरिवर्तनीय” करार दिया और चेतावनी दी कि यदि इन मांगों को 2026 विधानसभा चुनावों से पहले नहीं माना गया तो सरकार को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और डिब्रूगढ़ के पांच बार सांसद पबन सिंह घटोवार ने प्रदर्शन का समर्थन करते हुए सरकार से इन मुद्दों को तुरंत हल करने की मांग की।

आयोजकों ने घोषणा की कि असम के सभी जिलों में इसी तरह की रैलियां आयोजित की जाएंगी ताकि राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

मोरान, मोटोक, चुतिया, ताई-अहोम, कोच-राजबोंगशी और चाय जनजाति समुदाय वर्षों से ST दर्जा की मांग कर रहे हैं, जबकि कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं और मंत्रियों द्वारा नियमित रूप से आरक्षण देने की विभिन्न assurances दी जाती रही हैं।

ताजा घटनाक्रम में, 8 अक्टूबर को तिनसुकिया में हजारों चाय मजदूरों ने ST दर्जा और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके अलावा, 28 सितंबर को टिनसुकिया जिले के सादिया में स्थानीय मोटोक समुदाय के सदस्यों ने मशाल जुलूस आयोजित कर ST दर्जा और स्वायत्त परिषद के उन्नयन की मांग की।

 

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