चंद्र ग्रहण से शुरू होकर सूर्य ग्रहण पर खत्म होगा पितृपक्ष, श्राद्ध पर नहीं पड़ेगा असर

राष्ट्रीय डेस्क
नई दिल्ली 7 सितंबर 2025/असम.समाचार
पितरों को प्रसन्न करने के लिए की जाने वाली श्राद्ध क्रियाओं का पर्व पितृपक्ष इस वर्ष 7 सितंबर से प्रारंभ होकर 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। खास बात यह है कि इस बार पितृपक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण से और समापन सूर्य ग्रहण पर होगा। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या ग्रहण काल श्राद्ध कर्म को प्रभावित करेगा?
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पौरोहित विभाग के प्रोफेसर रामराज उपाध्याय के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा के दिन किया जाने वाला श्राद्ध चंद्र ग्रहण से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि चंद्र ग्रहण रात्रि में लगेगा और इसका सूतक काल मध्यान्ह के बाद शुरू होगा। ऐसे में पूर्णिमा श्राद्ध करने में कोई दोष या परेशानी नहीं है।
सूर्य ग्रहण का क्या होगा प्रभाव?
सूर्य ग्रहण केवल दक्षिण गोलार्ध में, मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग, अटलांटिक और अंटार्कटिका क्षेत्र में सूर्योदय के समय दिखाई देगा। यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण यूनिवर्सल समयानुसार 17:29 बजे से प्रारंभ होकर फिजी द्वीप समूह के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से अटलांटिक के पूर्वी छोर तक समाप्त होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसका भारत और पितृपक्ष के श्राद्ध कर्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
चंद्र ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा?
खग्रास चंद्र ग्रहण भारत सहित यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी भाग, दक्षिण अमेरिका के पूर्वी हिस्से, अंटार्कटिका, आर्कटिक, पैसिफिक, अटलांटिक, ऑस्ट्रेलिया, जापान, चीन और रूस आदि देशों में देखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पितृपक्ष के दौरान किसी भी प्रकार का दोष उत्पन्न नहीं होगा और लोग बिना किसी बाधा के अपने पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध विधिवत कर सकेंगे।



