Blogअसमगुवाहाटीथर्ड आईधर्म और आस्थाराजस्थानराष्ट्रीयलेटेस्ट खबरेंशिक्षासामाजिकसाहित्य

गुवाहाटी में गूंज रही फागुन की फुहार,होली-टोली के रंग में रंगी राजस्थानी संस्कृति, उमड़ा जनसैलाब

उल्लेखनीय है कि होली-टोली पिछले 32 वर्षों से राजस्थानी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सतत प्रयासरत है। संस्था का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण बनी रहे।

ओपी शर्मा,

गुवाहाटी 27 फ़रवरी 2026/असम.समाचार

फागुन की मादक बयार और चंग की थाप के साथ शहर में इन दिनों राजस्थानी संस्कृति का रंग चढ़ा हुआ है। होली-टोली, गुवाहाटी द्वारा आयोजित पारंपरिक होली महोत्सव इस वर्ष भी पूरे जोश और उल्लास के साथ नगरवासियों का मन मोह रहा है।

प्रतिदिन रात्रि 10 बजे से प्रारंभ हो रहा यह सांस्कृतिक आयोजन केदार रोड पर लोकगीतों, ढोलक की गूंज और बांसुरी की मधुर तानों से वातावरण को सरस और रंगमय बना रहा है। “फागण आयो रे” और पारंपरिक राजस्थानी होली गीतों की स्वरलहरियों पर झूमते युवाओं और मातृशक्ति का उत्साह देखते ही बनता है।

इस वर्ष अभूतपूर्व जनसमूह को देखते हुए आयोजन स्थल में परिवर्तन किया गया। पूर्व निर्धारित चाय गली में सीमित स्थान होने के कारण कार्यक्रम को श्री रामजी दास धानुका चेरिटेबल ट्रस्ट, केदार रोड परिसर में आयोजित किया जा रहा है। विशाल परिसर में आयोजित यह उत्सव पूर्णतः सफल सिद्ध हो रहा है, जहां प्रतिदिन भारी संख्या में समाजबंधु परिवार सहित पहुंचकर संस्कृति के इस रंगोत्सव का आनंद ले रहे हैं।

कार्यक्रम में युवा वर्ग और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजे प्रतिभागी जब चंग और ढोल की थाप पर थिरकते हैं तो मानो मरुधरा की माटी की खुशबू गुवाहाटी की फिजाओं में घुल जाती है। हर चेहरे पर उल्लास, हर स्वर में प्रेम और हर कदम में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व स्पष्ट झलकता है।

उल्लेखनीय है कि होली-टोली पिछले 32 वर्षों से राजस्थानी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सतत प्रयासरत है। संस्था का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण बनी रहे।

यह आयोजन केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और परंपरा संरक्षण का जीवंत उदाहरण है। फागुन के रंगों में सराबोर यह महोत्सव गुवाहाटी में राजस्थानी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
इस आशय की जानकारी शंकर बिड़ला होली-टोली, गुवाहाटी(राजस्थानी संस्कृति संरक्षण हेतु समर्पित) द्वारा दी गई।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!