चंग की थाप पर सजी फागुन की महफ़िल: हैबरगांव में गूंजे राजस्थानी लोकगीत

डिंपल शर्मा
नगांव (हैबरगांव बाजार) 19 फ़रवरी 2026
फागुन की मस्ती और रंगों की आहट के बीच “होली का चंग यारों के संग” कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत आज हैबरगांव बाजार में पारंपरिक अंदाज़ में की गई। वर्षों से शहर में राजस्थानी लोक संस्कृति की अलख जगाते आ रहे युवाओं की टोली ने भगवान गणेश की वंदना के साथ चंग की थाप पर होली के रंग बिखेर दिए।
कार्यक्रम की शुरुआत गणपति वंदना से हुई, जिसके बाद “गणपति बलकारी जी”, “बाबा श्याम के दरबार मची रे होली”, “चांद चढ़्यो गिगनार”, “मोर बोले रे” जैसे अनगिनत राजस्थानी लोकगीतों की सामूहिक प्रस्तुति ने माहौल को फागुनी बना दिया।
चंग की गूंजती थाप और पारंपरिक स्वर लहरियों ने बाजार में उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
युवाओं की यह टोली कई वर्षों से फागण के महीने में शहरवासियों को राजस्थान की लोक संस्कृति से जोड़ती आ रही है। खास बात यह है कि शिवरात्रि से ही चंग की शुरुआत की परंपरा निभाई जाती है, जो होली तक पूरे उत्साह के साथ जारी रहती है।
रंगों के पर्व से पहले लोकगीतों की यह अनोखी पहल न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है। हैबरगांव बाजार में गूंजती चंग की थाप ने यह साबित कर दिया कि फागुन केवल रंगों का नहीं, बल्कि लोक परंपराओं के पुनर्जागरण का भी पर्व है।



