असम में छह समुदायों को एसटी दर्जा देने की सिफारिश पर बवाल बोडोलैंड में आदिवासी छात्रों का उग्र प्रदर्शन, बीटीसी सचिवालय में तोड़फोड़
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बोडोलैंड यूनिवर्सिटी ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ने साफ कहा कि यह लड़ाई उनके अस्तित्व की है। यूनियन के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह सिर्फ राजनीतिक अधिकार का सवाल नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी जमीन और हमारे सामाजिक अधिकारों की सुरक्षा की लड़ाई है। इन समुदायों को एसटी दर्जा देना हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है।”

कनक चंद्र बोड़ो
कोकराझार, 29 नवंबर 2025/असम.समाचार
असम सरकार द्वारा राज्य के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की सिफारिश के विरोध में शुक्रवार को कोकराझार में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन भड़क उठा। बोडोलैंड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में 2,000 से अधिक आदिवासी छात्रों ने सड़क पर उतरकर राज्य सरकार और बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल प्रशासन के खिलाफ जोरदार रैली निकाली।
रैली के बाद गुस्साए छात्रों ने बीटीसी सचिवालय का घेराव किया, जहां हालात अचानक हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय परिसर में प्रवेश कर कार्यालयों में तोड़फोड़ की, कई महत्वपूर्ण फाइलें, कंप्यूटर और फर्नीचर क्षतिग्रस्त कर दिए। तीन घंटे से अधिक समय तक चले इस अराजक माहौल में सुरक्षा कर्मी पूरी तरह असहाय नजर आए।
छात्रों का आरोप है कि इन छह समुदायों को एसटी दर्जा मिलने से आदिवासी समाज के मौलिक अधिकार, भूमि सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक अवसरों पर सीधा खतरा पैदा हो जाएगा। उनका आक्रोश बीटीसी प्रशासन द्वारा जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को लेकर और बढ़ गया, जिसमें इन समुदायों को एसटी दर्जा देने की सिफारिश का समर्थन किया गया है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बोडोलैंड यूनिवर्सिटी ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ने साफ कहा कि यह लड़ाई उनके अस्तित्व की है। यूनियन के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह सिर्फ राजनीतिक अधिकार का सवाल नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी जमीन और हमारे सामाजिक अधिकारों की सुरक्षा की लड़ाई है। इन समुदायों को एसटी दर्जा देना हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है।”
हिंसक होते हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा। देर शाम तक पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में कर लिया, हालांकि क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है।
जिला प्रशासन ने छात्रों से शांतिपूर्ण संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। वहीं, राज्य सरकार अपने फैसले को लेकर दृढ़ है और उसका कहना है कि एसटी दर्जा मिलने से संबंधित समुदायों का समग्र विकास संभव होगा।
उधर, आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी चिंताओं को दूर नहीं करती, विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। आने वाले दिनों में और भी बड़े प्रदर्शनों की तैयारी की जा रही है।
असम में एसटी दर्जे को लेकर पैदा हुआ यह विवाद न केवल राजनीतिक तौर पर, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।




