काज़ीरंगा में विलुप्तप्राय कछुओं को नई ज़िंदगी,220 ब्लैक सॉफ्टशेल हैचलिंग्स प्राकृतिक आवास में छोड़े गए

विकास शर्मा
बिस्वनाथ,11 दिसंबर 2025/असम.समाचार
काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिज़र्व में आज संरक्षण प्रयासों को नई गति देते हुए 110 ब्लैक सॉफ्टशेल टर्टल (काला नरम-खोल कछुआ) हैचलिंग्स को बिस्वनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत पानपुर क्षेत्र स्थित सिलडोबी जलाशय में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। इससे पहले 24 अक्टूबर को 110 हैचलिंग्स की पहली खेप रौमारी बिल में छोड़ी गई थी। इस तरह अब तक कुल 220 हैचलिंग्स को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित किया जा चुका है।
कार्यक्रम में नदुआर विधानसभा के विधायक पद्म हज़ारिका ने विशेष उपस्थिति दर्ज कराते हुए कहा कि मीठे पानी के कछुए आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य के महत्त्वपूर्ण संकेतक हैं तथा नदी पारितंत्र को संतुलित रखने में इनकी बड़ी भूमिका है। उन्होंने नागशंकर मंदिर समिति, काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन और इंडिया टर्टल कंज़र्वेशन प्रोग्राम के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
यह अनूठी पहल असम वन विभाग और ITCP द्वारा मिलकर चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत नागशंकर मंदिर से कछुओं के अंडों को सुरक्षित रूप से एकत्र कर नियंत्रित वातावरण में उनका इनक्यूबेशन किया जाता है। इनके स्वस्थ हैचलिंग्स बनने के बाद उन्हें ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में वापस छोड़ा जाता है, ताकि इस विलुप्तप्राय प्रजाति की संख्या को बढ़ाया जा सके और इनके प्राकृतिक अस्तित्व को मजबूत आधार मिल सके।
यह संरक्षण प्रयास न केवल अनोखा है, बल्कि असम की जैव-विविधता को बचाने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम भी माना जा रहा है।



