डिब्रूगढ़:जनजातिकरण की मांग को लेकर लाहोवाल में मटक समुदाय का हाथों में मसाल लेकर जोरदार प्रदर्शन,

दिनेश दास
डिब्रूगढ़, 26 सितंबर 2025/असम.समाचार
मोरान के बाद अब डिब्रूगढ़ जिले में मटक समुदाय ने जनजातिकरण की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सदौ असम मटक युवा-छात्र सम्मेलन के नेतृत्व में तीस हजार से अधिक लोगों ने लाहोवाल की सड़कों पर जुटकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और राष्ट्रीय राजमार्ग को घंटों के लिए अवरुद्ध कर दिया।
डिकम के एकरातली से शुरू होकर लाहोवाल तक विरोध रैली में मटक समुदाय के युवा हाथों में हाथ डालकर आगे बढ़े और सबकी मांगे गूंज उठी। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार पर मटक समुदाय के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया।

केंद्रीय अध्यक्ष रंजीत गोहाईं ने कहा, “भूमिपुत्र मटक समुदाय को जनजातिकरण के नाम पर धोखा दिया गया है। यह धोखा समय पर चुकाना होगा। हम अपने अधिकारों के लिए हर कदम उठाएंगे।”
मुख्य सलाहकार मिंटू बोरपात्रागोहाइं ने कहा कि मटक समुदाय लंबे समय से उपेक्षित रहा है और बाहरी लोग उनका शोषण कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मटक कभी असमिया समाज से अलगाववादी दृष्टिकोण नहीं अपनाए हैं।
संगठन के महासचिव सौरभ गोहाईं ने चेतावनी दी कि यह आंदोलन अंतिम नहीं है और जनजातिकरण न मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन की शुरुआत प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि देकर उनके गीतों के माध्यम से की गई।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 12 सूत्री मांगपत्र सौंपा गया, जिसमें शामिल हैं:
मटक समुदाय को शीघ्र जनजातिकरण का दर्जा प्रदान करना
मटक समुदाय के लिए पूर्ण स्वायत्त शासन का प्रावधान
सामूहिक विकास के लिए शेष 875 करोड़ की राशि जल्दी जारी करना
ग्राम और नगर जनसंख्या के आधार पर स्वायत्त परिषदीय चुनाव आयोजित करना
जुबिन गर्ग की मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा
डिब्रूगढ़ जिले में बाढ़ और जलभराव की रोकथाम
अल्फा मुद्दे का स्थायी राजनीतिक समाधान
ट्रैफिक और स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार
सरकारी निकायों और निगमों में मटक उम्मीदवारों के लिए आरक्षण
नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार पर रोक
दूलियाजान आयल और बीसीपीएल में मटक समुदाय को प्राथमिकता
असम समझौते के तहत विदेशी प्रवासन समस्या का स्थायी समाधान
प्रदर्शन में संगठन के महासचिव किरण राजखोवा, केंद्रीय उपाध्यक्ष अजय गोगोई और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
मटक समुदाय ने साफ संदेश दिया कि उनकी जनजातिकरण की मांग पूरी किए बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा और संघर्ष जारी रहेगा।




