अगली जनगणना में असम में ‘मिया मुस्लिम’ सबसे बड़ा समुदाय होगा : मुख्यमंत्री हिमंत
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विधेयकों की रूपरेखा फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इनमें भूमि स्वामित्व, जनसंख्या नियंत्रण और नागरिकता आधारित पहचान से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

ओपी शर्मा
गुवाहाटी, 11 अक्टूबर 2025/असम.समाचार
असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए दावा किया कि राज्य में होने वाली अगली जनगणना में ‘मिया मुस्लिम’ (बांग्लाभाषी मुसलमान) सबसे बड़ा समुदाय बनकर उभरेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन असम की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना के लिए एक बड़ी चुनौती है, और इसी कारण उनकी सरकार ‘‘असम के मूल निवासियों की पहचान और हितों की रक्षा’’ के लिए ठोस कदम उठा रही है। “आगामी जनगणना के आंकड़े यह दिखाएंगे कि मिया मुस्लिम अब राज्य का सबसे बड़ा समुदाय बन चुका है। इस स्थिति में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि असमिया लोगों की सांस्कृतिक, भाषाई और भूमि संबंधी पहचान सुरक्षित रहे,” मुख्यमंत्री ने कहा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार इस दिशा में दो महत्वपूर्ण विधेयक लाने जा रही है, जिन पर अगले विधानसभा सत्र में चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य ‘‘असमिया समाज की जनसंख्या असंतुलन से रक्षा करना’’ और ‘‘स्थानीय संसाधनों पर असम के मूल समुदायों का अधिकार सुनिश्चित करना’’ होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि उनकी सरकार किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन ‘‘संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम जरूरी हैं’’। उन्होंने कहा कि असम सरकार विकास के साथ-साथ सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान आगामी 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को नया मोड़ दे सकता है। विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री समाज में ‘‘धार्मिक और भाषाई विभाजन’’ पैदा कर रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का तर्क है कि यह ‘‘जनसांख्यिकीय यथार्थ का स्पष्ट संकेत’’ है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
उल्लेखनीय है कि असम में मुस्लिम जनसंख्या पहले से ही करीब 35 प्रतिशत के आसपास है, जिनमें से बड़ी संख्या बांग्ला भाषी मुसलमानों की है, जिन्हें आमतौर पर ‘मिया मुस्लिम’ कहा जाता है।
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विधेयकों की रूपरेखा फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इनमें भूमि स्वामित्व, जनसंख्या नियंत्रण और नागरिकता आधारित पहचान से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
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