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मुख्यमंत्री कोनराड संगमा और राजस्थान फाउंडेशन के नॉर्थ ईस्ट अध्यक्ष रतन शर्मा की सार्थक मुलाकात

राजस्थान–मेघालय संबंधों को नई ऊंचाई, शिलांग में बनेगा राजस्थान भवन

विकास शर्मा

शिलांग 17 फ़रवरी 2026/असम.समाचार

राजस्थान और मेघालय के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक रिश्तों को और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। बहुत जल्द शिलांग (मेघालय) में राजस्थान भवन और राजस्थान में मेघालय भवन का निर्माण किया जाएगा। इस संबंध में आज मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा से राजस्थान फाउंडेशन (नॉर्थ ईस्ट) के अध्यक्ष एवं समाजसेवी-उद्यमी रतन शर्मा ने शिष्टाचार भेंट की।

मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक, सामाजिक, व्यापारिक और शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तार से चर्चा की। बैठक सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई।

मुख्यमंत्री कोनराड संगमा का वक्तव्य

मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि राजस्थान और मेघालय भौगोलिक रूप से भले ही दूर हों, लेकिन सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं की समृद्धि दोनों राज्यों को जोड़ती है। उन्होंने प्रस्तावित राजस्थान भवन और मेघालय भवन को आपसी सहयोग का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि इससे पर्यटन, व्यापार और छात्र आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा, “हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं, जहां पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के बीच मजबूत सेतु स्थापित हो। यह पहल केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो संस्कृतियों के मिलन का प्रतीक है।”

मुख्यमंत्री ने रतन शर्मा की पहल की सराहना करते हुए उन्हें दूरदर्शी और सकारात्मक सोच वाला सामाजिक प्रतिनिधि बताया।

रतन शर्मा का वक्तव्य

राजस्थान फाउंडेशन (नॉर्थ ईस्ट) के अध्यक्ष रतन शर्मा ने मुख्यमंत्री संगमा को दूरदर्शी, ऊर्जावान और गतिशील नेता बताते हुए कहा कि उनकी सकारात्मक सोच से दोनों राज्यों के संबंधों को नई गति मिलेगी।शर्मा ने कहा, “राजस्थान हमारी मातृभूमि है और मेघालय हमारी कर्मभूमि। दोनों राज्यों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना हमारा कर्तव्य है। राजस्थान भवन और मेघालय भवन सांस्कृतिक समन्वय, सामाजिक सहयोग और आर्थिक सहभागिता के केंद्र बनेंगे।”उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से न केवल प्रवासी राजस्थानी समाज को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ भी आपसी समझ और भाईचारा मजबूत होगा।सांस्कृतिक सेतु का निर्माण इस ऐतिहासिक पहल को “मातृभूमि और कर्मभूमि के बीच मजबूत बंधन” के रूप में देखा जा रहा है। दोनों राज्यों के बीच पर्यटन, हस्तशिल्प, शिक्षा, उद्यमिता और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की भी योजना है।

राजस्थान-मेघालय मित्रता की यह नई शुरुआत राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय का सशक्त उदाहरण मानी जा रही है।

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