नगांव के लुतामारी रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में चला बड़ा बेदखली अभियान लगभग 1,700 परिवार प्रभावित, 5,962 बीघा संरक्षित भूमि मुक्त

डिंपल शर्मा
नगांव, 29 नवंबर 2025/असम.समाचार
नगांव जिले के लुतामारी रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में शनिवार को विशाल बेदखली अभियान शुरू हुआ, जिसमें करीब 1,700 परिवारों को हटाया गया। इन पर लगभग 5,962 बीघा संरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण का आरोप है। तीन महीने पहले नोटिस जारी किए जाने के बाद यह कार्रवाई तेज की गई।
अभियान का नेतृत्व वन विभाग ने किया, जिसके लिए 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यह राज्य सरकार द्वारा सुरक्षित वन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त करने के चल रहे प्रयास का हिस्सा है।
वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद
नगांव के उपायुक्त देवाशीष शर्मा और वरिष्ठ वन अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी में शामिल रहे। शर्मा ने कहा कि लुतामारी रिज़र्व फ़ॉरेस्ट वर्ष 1919 से संरक्षित वन घोषित है, जहां किसी भी तरह का मानव बसाव मान्य नहीं है। उन्होंने निवासियों से शांतिपूर्वक सहयोग की अपील की।
परिवारों ने पुनर्वास की उठाई मांग
बेदखल किए गए कई परिवारों ने सरकार से पुनर्वास की गुहार लगाई।एक निवासी ने कहा “अब हमारे पास रहने की कोई जगह नहीं है। सरकार ने यदि जमीन दे दी होती, तो हम आदेश के अनुसार खुद ही हट जाते। हम पुनर्वास चाहते हैं।”
न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई
वन विभाग के विशेष मुख्य सचिव एम.के. यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, अतिक्रमण हटाने से इलाके में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि लुतामारी के 6,000 बीघा और बोरपानी के 1,600 बीघा क्षेत्र को मुक्त किए जाने के बाद जिले को बड़ी राहत मिलेगी।
अभियान से पहले हुई उच्च स्तरीय बैठक
बेदखली अभियान शुरू करने से पहले उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई और स्थल निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया गया। प्रशासन ने कहा कि आगे भी संरक्षित वनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की कार्रवाई जारी रहेगी।
स्थानीय निवासी अब्दुल खालिक का दर्द
अब्दुल खालिक, जो पिछले कई दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे थे, ने बेदखली को अमानवीय बताते हुए कहा “हम यहाँ 40–50 साल से रह रहे हैं। हिंदू–मुस्लिम सब मिलजुल कर रहते थे। अब घर छीन लिए गए और हम बेघर हो गए। हमें लगता है कि हमें मुसलमान होने की वजह से ज्यादा सताया गया। सरकार को चाहिए था कि पहले उचित पुनर्वास करती। इस तरह की बेदखली बेहद अमानवीय है और लगता है कि सरकार ने हमें निशाना बनाया है।”




