भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी शाखा द्वारा भावपूर्ण स्मृति सभा का आयोजन
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, प्रांतीय पदाधिकारियों तथा गुवाहाटी की सभी पाँचों शाखाओं के प्रतिनिधियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। संचालन प्रांतीय महामंत्री रमेश कुमार चांडक ने किया।

विकाश जोशी
गुवाहाटी, 5 नवम्बर 2025
पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के आह्वान पर, मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी शाखा द्वारा भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. भूपेन हजारिका जी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक भावपूर्ण स्मृति सभा का आयोजन श्रद्धांजलि कॉम्प्लेक्स स्थित अपने निजी कार्यालय में किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. हजारिका के अद्वितीय व्यक्तित्व, लोक-संगीत, साहित्य और समाजसेवा के प्रति उनके अविस्मरणीय योगदान को स्मरण करना एवं नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरित करना रहा।
उनका जीवन केवल संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक सांस्कृतिक दूत, समाज सुधारक और मानवता के सच्चे साधक थे, जिन्होंने अपने गीतों से असम और भारत के हृदय को जोड़ा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी शंकरलाल गोयनका, मुख्य वक्ता के रूप में ‘प्रतिदिन’ समाचार पत्र के मुख्य सहायक संपादक अच्युत पटवारी, भारतीय जनता पार्टी के वार्ड पार्षद एवं वक्ता प्रमोद स्वामी, तथा सुप्रसिद्ध साहित्यकार किशोर काला, साथ ही प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा द्वारा भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. भूपेन हजारिका जी की तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित करने से हुआ।
गुवाहाटी शाखा अध्यक्ष शंकर बिड़ला तथा टीम सदस्यों द्वारा सभी अतिथियों का फुलाम गामोछा पहनाकर स्वागत-अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा ने भूपेन दा के प्रेरक कार्यों का स्मरण करते हुए कहा “भूपेन दा ने संगीत को समाजसेवा का माध्यम बनाया। उनके गीत केवल सुरीले नहीं थे, बल्कि सामाजिक चेतना का शंखनाद थे।”
मुख्य वक्ताओं ने अपने विचारों में डॉ. हजारिका के जीवन, संगीत और समाज के प्रति योगदान पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।अच्युत पटवारी ने कहा कि भूपेन दा की आवाज़ सद्भाव, एकता और मानवता की अमर पुकार थी।
प्रमोद स्वामी ने उनके गीतों के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित किया, वहीं श्री किशोर काला ने उन्हें ‘उत्तर-पूर्व का गानगंधर्व’ बताते हुए कहा कि उन्होंने शब्दों को सुरों से बाँधकर आत्मा को झंकृत करने वाली संवेदना रची।
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों, प्रांतीय पदाधिकारियों तथा गुवाहाटी की सभी पाँचों शाखाओं के प्रतिनिधियों ने उपस्थिति दर्ज कराई।
संचालन प्रांतीय महामंत्री रमेश कुमार चांडक ने किया। उन्होंने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि “भूपेन दा की स्मृतियाँ समाज को एकता, संस्कृति और सेवा की प्रेरणा देती हैं। हमें उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।”
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने दीप प्रज्ज्वलित कर ‘दीप श्रंखला’ बनाई, जो भूपेन दा की स्मृति में एकता और प्रकाश का प्रतीक बनी।
कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली पर्व के अवसर पर यह आयोजन भूपेन दा के गीतों की तरह ही एकता, सद्भाव और संस्कृति के प्रकाश से आलोकित हो उठा।




