पालतू कुत्ते के लिए श्राद्ध और वैष्णव सेवा: मालिक की ममता ने रच दिया अनोखा उदाहरण
बप्पन कर के इस कदम ने यह संदेश दिया कि इंसान और जानवर के बीच का रिश्ता भी उतना ही गहरा और भावनात्मक हो सकता है। पालतू जानवरों के प्रति उनके प्रेम और संवेदनशीलता ने पूरे इलाके में एक मिसाल कायम कर दी है।

करुणा देव
श्रीभूमि 18 दिसंबर 2025/असम.समाचार
प्यार की कोई सीमा नहीं होती।यह कहावत असम के श्रीभूमि शहर के सरिशा इलाके में सच साबित हुई, जहां एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते को परिवार के सदस्य की तरह विदा दी। यहां रहने वाले बप्पन कर के घर में पालतू कुत्ते के लिए पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार, श्राद्ध और वैष्णव सेवा का आयोजन किया गया, जिसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
करीब तीन वर्ष पहले बप्पन कर के बेटे ने एक कुत्ते को घर लाया था, जिसका नाम ‘चेम’ रखा गया। समय के साथ चेम अपने सौम्य और मित्रवत स्वभाव के कारण परिवार के हर सदस्य के दिल के बेहद करीब हो गया। धीरे-धीरे वह सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गया।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, पिछले दस दिनों में चेम की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसके इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। बीते सोमवार को बीमारी के कारण चेम की मौत हो गई। चार पालतू कुत्तों में वह सबसे छोटा था। उसकी मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
परिवार ने चेम को परिवार का सदस्य मानते हुए हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार पहले उसका अंतिम संस्कार किया। इसके तीन दिन बाद विधिवत श्राद्ध कर्म संपन्न हुआ और उसके बाद वैष्णव सेवा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर करीब चार सौ से अधिक लोगों को आमंत्रित किया गया, जिन्हें विभिन्न व्यंजनों के साथ प्रसाद परोसा गया।
परिवार के सदस्य सुदीप दास और संजय दास ने बताया कि चेम केवल एक पालतू जानवर नहीं था, बल्कि परिवार का हिस्सा था, इसलिए उसके लिए वही संस्कार किए गए, जो किसी अपने के लिए किए जाते हैं।
बप्पन कर के इस कदम ने यह संदेश दिया कि इंसान और जानवर के बीच का रिश्ता भी उतना ही गहरा और भावनात्मक हो सकता है। पालतू जानवरों के प्रति उनके प्रेम और संवेदनशीलता ने पूरे इलाके में एक मिसाल कायम कर दी है।



