असम

बीटीसी में वन विभाग में नियुक्ति पारदर्शी और उचित नहीं हुई – पूर्व ई.एम. गणेश कछारी

29 नं. शुक्लाई शेरफांग परिषदीय क्षेत्र में बीपीएफ की सदस्यता अभियान

सेंकी अग्रवाल

गोरेस्वर,21 अगस्त/असम.समाचार

2003 में गठित हुई बीटीसी के बाद हाग्रामा महिलारी द्वारा काफी सड़कों का निर्माण इस इलाके में किया गया था। वही सड़कों में आज प्रमोद बोरो सायरन बजाकर जाते,उनको शर्म नहीं आती। आज शाम तामुलपुर जिले के 29 नं. शुक्लाई शेरफांग परिषदीय क्षेत्र में आयोजित बीपीएफ की सदस्यता सभा में पूर्व ई.एम. और बीपीएफ पार्टी के प्रत्याशी गणेश कछारी ने उक्त बात कही कछारी ने यह भी कहा कि प्रमोद बोरो ने कोई विकासात्मक कार्य नहीं किया। हाग्रामा महिलारी के समय में जो विकास हुआ, वही है। बीपीएफ के समय में तैयार किए गए योजनाओं का यूपीपीएल के समय में कार्यान्वयन किया गया है, लेकिन वो लोग नई योजनाएं नहीं ला पाए । इस बार हाग्रामा महिलारी के नेतृत्व में बीटीसी में सरकार बनाने का दावा कछारी ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के द्वारा प्रमोद बोरो के नेतृत्व वाले यूपीपीएल सरकार के समय असम सरकार द्वारा लिए गए 14 विभागों को पुनः बीटीसी के अधीन लेकर आयेंगे। बीपीएफ की ओर आकर्षित होकर क्षेत्र में प्रतिदिन सदस्यता सभा आयोजित हो रही हैं। बीटीसी में नौकरियों की नियुक्ति के संदर्भ में कछारी ने वन विभाग में पारदर्शिता से नियुक्ति नहीं होने का आरोप लगाया। उल्लेखनीय है कि आगामी सितंबर माह में आयोजित होने वाले बीटीसी के पाँचवें परिषदीय चुनाव के लिए बीपीएफ की पहली सूची में स्थान पाने वाले गणेश कछारी सहित उनके समर्थकों ने दिन-रात 29 नं. शुक्लाई शेरफांग परिषदीय क्षेत्र में मजबूत संगठनात्मक आधार स्थापित करने का प्रयास कर रहें हैं। एक ही दिन में बीपीएफ के नेताओ की समर्थन में 6-7 स्थानों पर बीपीएफ की सदस्यता बैठक आयोजित की जा रही है। उल्लेखनीय है कि बीटीसी के बीपीएफ के तीन कार्यकाल में उक्त क्षेत्र के परिषद एवं कार्यकारी सदस्य के रूप में कार्यभार निभाने वाले कछारी पिछली परिषदीय चुनाव में भाजपा के रणेंद्र नर्जारी के हाथों पराजित हुए थे। उस समय मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व शर्मा ने क्षेत्र में चुनावी प्रचार किया था। इसके अलावा यूपीपीएल पार्टी के प्रत्याशी भी वोट विभाजन के कारण बीपीएफ के प्रत्याशी गणेश कछारी को कम मतों के अंतर से पराजित होना पड़ा था। इस बार बीपीएफ पार्टी एवं प्रत्याशी गणेश कछारी ने क्षेत्र को उबारने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आज शाम क्षेत्र के काड़ीपाड़ा में सदस्यता बैठक आयोजित की गई। बैठक में पहले से विभिन्न दलों का समर्थन कर रहे लगभग सौ से अधिक पुरुषों एवं महिलाओं ने प्रत्याशी के प्रति आकर्षित होकर बीपीएफ में सदस्यता ली। बाबुल बोरो के संचालन में आयोजित सभा में शुक्लाई शेरफांग ब्लॉक बीपीएफ के साधारण सचिव दिगंत बेजबरुआ ने कहा कि हमारे क्षेत्र में 52 गांव हैं। नए मतदाताओं के संदर्भ में कहा कि असम के अन्य क्षेत्रों में ऐसा नहीं है,लेकिन हमारे क्षेत्र में स्वतंत्रता के समय से किसी ने ऐसा नहीं देखा था। लेकिन गणेश कछारी के नेतृत्व में काफी विकास हुआ है। गांव में सड़क नहीं थी। शुक्लाई में सड़क थी। 2005 तक पक्की सड़क नहीं थी। सड़क की खराब स्थिति के कारण रास्ते में ही प्रसूति रोगी की मृत्यु हो जाती थी। गणेश कछारी को शुक्लाई सेरफांग का हीरो कहा जा सकता है। कछारी के समय में क्षेत्र में डेढ़ सौ किलोमीटर सड़क पक्की की गई थी। 539 से अधिक पुलों का निर्माण किया गया। नावकाटा में असम का पहला द्विमंजिला मिनी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र का निर्माण किया गया था। इसके अलावा बंगालिपारा प्राथमिक और शुक्लाई में जोगेंद्र बसुमतारी स्मारक चिकित्सालय का निर्माण किया गया। किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था में भी महत्व देकर लगभग 22 कृषिबांधो का निर्माण किया गया। शुक्लाई सेरफांग सिंचाई परियोजना का विकास भी किया गया है। उत्तर पूर्वांचल के भीतर एकमात्र शुक्लाई सेरफांग जलसिंचन परियोजना की कार्य लाया गया । आज भी आधुनिककरण का कार्य चल रहा है। यह कार्य बीपीएफ की देन हैं। भाजपा कुछ नहीं दे सकती, लेकिन हमारे सभा में आए लोगों की योजनाएं बंद करने की धमकी देती है। स्विट्जरलैंड का सपना दिखाने वाला बीटीआर सरकार ने क्या किया देखा है। बैठक में उपस्थित रहे सोणाराम बसुमतारी, अवकाश प्राप्त शिक्षक रमेश दास, दीपक शर्मा, हरेश्वर कुंवर, प्रमोद शर्मा, गजेन डेका, रोजा अली, पवित्र कलिता, दिनलाल शर्मा, नाजिम अली, दिगंत बेजबरुआ, मुनिंद्र बरूआ, सतीश दास, रिंकी कुंवर, चित्रा डेका, करीमा बसुमतारी, हीयामणि नाथ के साथ ही केंद्रीय,जिला व ब्लॉक समिति के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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