असम

राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में उतरा आमसू, अतिक्रमण हटाओ अभियान को बताया ‘अमानवीय’

कनक चंद्र बोरो

कोकराझार, 12 जुलाई

असम सरकार द्वारा सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने के नाम पर चलाए जा रहे अभियान के विरोध में शनिवार को ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (आमसू) ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। आमसू ने इन अतिक्रमण विरोधी अभियानों को ‘अमानवीय’ करार देते हुए कहा कि इससे राज्यभर में हज़ारों गरीब और वंचित परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

कोकराझार ज़िले में आमसू की ज़िला इकाई ने बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) की राजधानी के गांधी पार्क में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “असम सरकार मुर्दाबाद”, “असम पुलिस शर्म करो”, “अमानवीय अतिक्रमण हटाओ बंद करो” जैसे नारों से गांधी पार्क का माहौल भावुक और उग्र बन गया।

प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालने का प्रयास भी किया, लेकिन कोकराझार पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें बीच में ही रोक दिया।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में हाल ही में राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान हैं। 8 जुलाई को धुबड़ी ज़िले के चापर क्षेत्र में करीब 3,500 बीघा ज़मीन पर सरकार ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इसी तरह शुक्रवार को गोलपाड़ा ज़िले के पाइकन क्षेत्र में भी अभियान चलाया गया, जिससे कई परिवार विस्थापित हो गए।

इस कार्रवाई के विरोध में आमसू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर इन अभियानों को रोकने की मांग की गई है।

प्रेस को संबोधित करते हुए आमसू के सहायक महासचिव अमिनुल इस्लाम ने कहा —

“हम इन अमानवीय अतिक्रमण विरोधी अभियानों को स्वीकार नहीं करते। इनकी वजह से आम जनता त्रस्त है। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। इसलिए हम इसे अमानवीय मानते हैं। हमारी मांग है कि इन अभियानों को तुरंत रोका जाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।”

राज्य के विभिन्न हिस्सों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आमसू की स्थानीय इकाइयों द्वारा आयोजित किए गए, जिससे यह मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है।

 

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