असमधर्म और आस्था

धुबड़ी की पावन भूमि पर पहली बार पितृपक्ष में भागवत कथा का आयोजन

राजा शर्मा

धुबड़ी 13 सितंबर 2025/असम.समाचार

पितृपक्ष के पावन अवसर पर धुबड़ी नगर पहली बार श्रीभागवत कथा की मधुर रसधारा में डूबा हुआ है। सत्यनारायण ठाकुरवाड़ी बाड़ी में 10 सितंबर से प्रारंभ हुई इस कथा में स्थानीय श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति देखी जा रही है।

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कार्यक्रम का संचालन धुबड़ी सनातनी धर्म के तत्वावधान में किया जा रहा है। समाज के लोगों ने कथा पांडाल की सुंदर सज्जा से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक की सभी व्यवस्थाएँ अपने हाथों में ले रखी हैं, ताकि किसी भक्त को कोई असुविधा न हो।

कथा व्यास अयोध्या से पधारे अंकितानंद महाराज हैं, जिनका उद्बोधन भक्तों के लिए आत्मिक आनंद और धर्मजागरण का संदेश लेकर आया है। महाराज ने कहा
“सनातन धर्म जब तक जीवित है, तब तक सनातनी जीवित रहेंगे। इसलिए प्रदेश-प्रदेश में भागवत कथा और धार्मिक आयोजन होने चाहिए। पितृपक्ष में भागवत कथा सुनने से पितरों को मोक्ष और परिवार को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।”

इस अवसर पर उन्होंने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, बिहार और असम की इस पुण्यभूमि धुबड़ी में ‘सनातन जिंदा रहेगा, तब तक सनातनी जिंदा रहेंगे’ का उद्घोष किया।

श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। भक्तजन बड़े आनंद और भावविभोर होकर कथा का श्रवण कर रहे हैं।

यह आयोजन कराने में सनई सनातनी समाज की अग्रणी भूमिका रही, जिन्होंने इस प्रथम आयोजन को धुबड़ी के धार्मिक इतिहास में अविस्मरणीय बना दिया है।

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